जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का इतिहास, महत्व और पौराणिक कथा
पुरी। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत के सबसे प्राचीन और विशाल धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन ओडिशा के पुरी से शुरू होने वाली यह यात्रा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होती है। इस वर्ष भी भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर तक नगर भ्रमण करेंगे।
क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा की पौराणिक कथा?
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ वर्ष में एक बार अपनी मौसी के घर जाने के लिए श्रीमंदिर से निकलते हैं। यह यात्रा पुरी के मुख्य मार्ग ‘बड़ा डांडा’ से होकर लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर तक पहुंचती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान सात दिन तक गुंडीचा मंदिर में निवास करते हैं। इसके बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से पुनः श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में रथ यात्रा का विशेष महत्व माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ का दर्शन करने या रथ खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचने को सौभाग्य मानते हैं।
यह यात्रा समानता और समरसता का भी प्रतीक है, क्योंकि इसमें जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठकर सभी श्रद्धालु भगवान के दर्शन और सेवा में शामिल होते हैं।
तीन रथों की क्या है विशेषता?
रथ यात्रा में तीन अलग-अलग रथ तैयार किए जाते हैं।
• भगवान जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ कहलाता है।
• भगवान बलभद्र का रथ ‘तालध्वज’ नाम से जाना जाता है।
• देवी सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ या ‘देवदलन’ कहलाता है।
इन तीनों रथों का निर्माण हर वर्ष नई लकड़ी से पारंपरिक विधि के अनुसार किया जाता है। यात्रा समाप्त होने के बाद अगले वर्ष नए रथ बनाए जाते हैं।
कैसे हुई रथ यात्रा की शुरुआत?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मालवा के राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान नीलमाधव की खोज के बाद भगवान जगन्नाथ की स्थापना कराई। समय के साथ भगवान जगन्नाथ की नगर यात्रा की परंपरा शुरू हुई, जो आगे चलकर विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के रूप में स्थापित हो गई। आज यह उत्सव ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
पुरी ही नहीं, कई राज्यों में निकलती है रथ यात्रा
यद्यपि सबसे प्रसिद्ध रथ यात्रा ओडिशा के पुरी में आयोजित होती है, लेकिन गुजरात के अहमदाबाद, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य राज्यों में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा बड़े उत्साह के साथ निकाली जाती है।
लाखों श्रद्धालु होते हैं शामिल
हर वर्ष रथ यात्रा में देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, श्रद्धा और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।
