ITR Filing 2026: आयकर रिटर्न भरते समय भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना आ सकता है इनकम टैक्स विभाग का नोटिस
नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय चल रहा है और बड़ी संख्या में करदाता अपना रिटर्न भर रहे हैं। ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस, रिफंड में देरी या जुर्माने का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ITR दाखिल करते समय कुछ सामान्य गलतियों से बचकर करदाता अनावश्यक परेशानी से बच सकते हैं।
आयकर विभाग भी करदाताओं से सही जानकारी, उचित ITR फॉर्म और समय पर ई-वेरिफिकेशन करने की अपील करता है। गलत जानकारी मिलने पर रिटर्न को डिफेक्टिव माना जा सकता है और विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
गलती नंबर 1: गलत ITR फॉर्म का चयन
सबसे आम गलती गलत ITR फॉर्म चुनना है। हर करदाता की आय के स्रोत के अनुसार अलग-अलग ITR फॉर्म निर्धारित किए गए हैं।
यदि किसी व्यक्ति ने गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल कर दिया, तो आयकर विभाग उसे डिफेक्टिव रिटर्न मान सकता है और सुधार के लिए नोटिस जारी कर सकता है।
गलती नंबर 2: सभी आय का खुलासा नहीं करना
कई लोग केवल वेतन की आय दिखाते हैं और बैंक ब्याज, एफडी का ब्याज, किराये की आय, डिविडेंड, पूंजीगत लाभ या अन्य आय का उल्लेख नहीं करते।
आयकर विभाग के पास विभिन्न स्रोतों से वित्तीय जानकारी उपलब्ध रहती है। ऐसे में आय छिपाने या अधूरी जानकारी देने पर नोटिस आ सकता है।
गलती नंबर 3: Form 16, AIS और Form 26AS का मिलान नहीं करना
ITR भरने से पहले Form 16, Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS का मिलान करना जरूरी है।
यदि TDS, ब्याज, निवेश या अन्य वित्तीय जानकारी में अंतर रह जाता है तो रिटर्न की जांच के दौरान समस्या आ सकती है और विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
गलती नंबर 4: गलत कटौती या छूट का दावा
कुछ करदाता बिना पात्रता के टैक्स छूट या कटौती का दावा कर देते हैं।
यदि दावा किए गए निवेश या खर्च के समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो विभाग उन्हें अस्वीकार कर सकता है। गलत दावा करने पर अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
गलती नंबर 5: ITR दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन भूल जाना
रिटर्न भरने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।
यदि निर्धारित समय के भीतर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया जाता, तो दाखिल किया गया ITR मान्य नहीं माना जाएगा। करदाता आधार OTP, नेट बैंकिंग या अन्य उपलब्ध माध्यमों से ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं।
समय पर करें सुधार
यदि ITR दाखिल करने के बाद किसी प्रकार की गलती का पता चलता है, तो करदाता संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करके उसे सुधार सकते हैं। समय रहते त्रुटि सुधारने से अनावश्यक विवाद और नोटिस से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
कर विशेषज्ञों का कहना है कि ITR दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय दस्तावेजों की जांच करें, सही फॉर्म चुनें, सभी आय का खुलासा करें और रिटर्न जमा करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन अवश्य करें।
सही और सटीक जानकारी के साथ दाखिल किया गया आयकर रिटर्न न केवल रिफंड की प्रक्रिया को तेज करता है, बल्कि आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलने की संभावना भी काफी कम कर देता है।
