UP Politics: यूपी में ‘सनातन’ पर सियासी संग्राम तेज, सपा और कांग्रेस के बदले सुर पर BJP का निशाना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में ‘सनातन’ और हिंदुत्व की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के हालिया बयानों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने दोनों दलों पर निशाना साधा है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि वह सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था का सम्मान करता है तथा भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के कई बयान राजनीतिक बहस का विषय बने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
BJP ने लगाया ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ का आरोप
भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस चुनावी माहौल को देखते हुए अब ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राजनीति कर रही हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि जो दल पहले हिंदुत्व और सनातन पर सवाल उठाते थे, वे अब मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी दिखा रहे हैं।
सपा ने दिया जवाब
समाजवादी पार्टी का कहना है कि सनातन किसी एक राजनीतिक दल की विचारधारा नहीं है। पार्टी का दावा है कि वह हमेशा सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करती रही है। सपा नेताओं का कहना है कि भाजपा धार्मिक मुद्दों को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
कांग्रेस ने भी रखा पक्ष
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी हाल के दिनों में धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और सनातन पर अपनी बात रखी है। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी की विचारधारा सभी धर्मों के सम्मान और संविधान के मूल्यों पर आधारित है।
चुनाव से पहले बदला राजनीतिक विमर्श
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों की चर्चा बढ़ना स्वाभाविक है। भाजपा हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है, जबकि विपक्ष खुद को धार्मिक आस्था के विरोधी बताए जाने की धारणा को बदलने की कोशिश कर रहा है।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव अभियान में विकास, कानून व्यवस्था, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों के साथ सनातन, हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा भी प्रमुख चुनावी विमर्श का हिस्सा बना रह सकता है। ऐसे में भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
