E20 पेट्रोल विवाद में बड़ा फैसला, उपभोक्ता आयोग ने कार बदलने या 20.50 लाख रुपये लौटाने का दिया आदेश

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रायपुर। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर जारी बहस के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने एक कार निर्माता कंपनी और उसके अधिकृत डीलर को निर्देश दिया है कि वे ग्राहक को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई E20 अनुकूल (E20 Compatible) कार उपलब्ध कराएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो वाहन की खरीद कीमत 20,50,494 रुपये वापस की जाए। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। यह आदेश 14 जुलाई 2026 को पारित किया गया।

डॉ. प्रेमराज देवता ने दर्ज कराई थी शिकायत

यह मामला रायपुर निवासी डॉ. प्रेमराज देवता द्वारा दायर उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, उन्होंने जून 2024 में एक नई ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार खरीदी थी। कुछ महीनों बाद वाहन में बार-बार इंजन संबंधी खराबी आने लगी और उसे कई बार अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा।

E20 पेट्रोल को बताया समस्या की वजह

शिकायतकर्ता का दावा था कि वाहन में डाले गए E20 पेट्रोल के कारण इंजन में लगातार चोकिंग और तकनीकी खराबी आ रही थी। उन्होंने ईंधन का परीक्षण एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से कराया, जिसकी रिपोर्ट को आयोग के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

कंपनी और डीलर ने आरोपों से किया इनकार

वाहन निर्माता और अधिकृत डीलर ने आयोग के समक्ष कहा कि कार में किसी प्रकार की निर्माण संबंधी खामी नहीं थी और इंजन की समस्या का E20 पेट्रोल से सीधा संबंध नहीं है। हालांकि आयोग ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद उपभोक्ता को राहत देने का आदेश दिया।

आयोग ने दिए ये निर्देश

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को उसी मॉडल की नई E20 अनुकूल कार उपलब्ध कराई जाए। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो वाहन की पूरी खरीद राशि 20,50,494 रुपये लौटाई जाए।

इसके अतिरिक्त आयोग ने 1 लाख रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए और 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया। तय समय में आदेश का पालन नहीं होने पर राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

E20 पेट्रोल पर जारी है बहस

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानती है।

दूसरी ओर, कुछ वाहन मालिकों ने पुराने या गैर E20 अनुकूल वाहनों में इंजन प्रदर्शन, माइलेज और रखरखाव को लेकर चिंताएं जताई हैं। हालांकि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पहले ही कह चुके हैं कि E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों का कोई व्यापक वैज्ञानिक आधार नहीं है, हालांकि इससे माइलेज पर कुछ असर पड़ सकता है।

फैसले का व्यापक असर

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि यह फैसला इस विशेष मामले के तथ्यों और आयोग के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों पर आधारित है। इसे सभी E20 ईंधन या सभी वाहनों पर समान रूप से लागू माना जाना उचित नहीं होगा। आने वाले समय में ऐसे अन्य मामलों में अदालतें और उपभोक्ता आयोग उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग निर्णय दे सकते हैं।

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