EV अपनाने से 2050 तक बच सकती हैं 17 लाख जानें, ICCT रिपोर्ट में भारत के लिए बड़ा दावा

0
EV

नई दिल्ली। यदि भारत 2045 तक पूरी तरह शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) वाहनों की बिक्री का लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो वर्ष 2050 तक करीब 17 लाख समय से पहले होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। यह दावा इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की नई रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने से वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

हर साल 90 हजार लोगों की समय से पहले हो रही मौत

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में सड़क परिवहन से होने वाले प्रदूषण के कारण भारत में लगभग 90,000 लोगों की समय से पहले मौत हुई। इसके अलावा करीब 15,300 बच्चों में अस्थमा के नए मामले सामने आए। अध्ययन के मुताबिक, भारत में वाहन प्रदूषण के कारण औसतन हर छह मिनट में एक व्यक्ति की समय से पहले मौत हो रही है।

दिल्ली-एनसीआर सबसे अधिक प्रभावित

ICCT की रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर को सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है। वर्ष 2024 में इस क्षेत्र में वाहन प्रदूषण के कारण लगभग 8,100 समयपूर्व मौतें दर्ज की गईं। वहीं बच्चों में अस्थमा के देशभर के नए मामलों में करीब 23 प्रतिशत अकेले दिल्ली-एनसीआर से जुड़े पाए गए।

ट्रक और बसें सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी वाहन, जैसे ट्रक और बसें, सड़क परिवहन से होने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन का लगभग 79 प्रतिशत हिस्सा पैदा करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल निजी कारों और दोपहिया वाहनों ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक वाहनों का भी तेजी से विद्युतीकरण जरूरी है।

2045 तक जीरो-एमिशन लक्ष्य पर जोर

अध्ययन में एक ऐसे परिदृश्य का आकलन किया गया है, जिसमें भारत वर्ष 2045 तक सभी नए वाहनों की बिक्री को शून्य-उत्सर्जन वाहनों में बदल देता है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि इस लक्ष्य से वर्ष 2050 तक 17 लाख समयपूर्व मौतों और लगभग 97,200 बच्चों में अस्थमा के मामलों को रोका जा सकता है।

स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण को भी होगा लाभ

विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने का उपाय नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा का भी प्रभावी माध्यम है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ परिवहन नीति से वायु गुणवत्ता में सुधार होगा, स्वास्थ्य पर खर्च कम होगा और लाखों लोगों का जीवन सुरक्षित किया जा सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ये समाचार भी पढ़ें :