पेलेट गन पर क्यों मचा है विवाद? जानिए क्या है यह हथियार, कब और किन परिस्थितियों में किया जाता है इस्तेमाल
नई दिल्ली। दिल्ली में हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद के बाद यह हथियार एक बार फिर चर्चा में है। प्रदर्शनकारियों की ओर से पेलेट गन के उपयोग के आरोप लगाए गए हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उसके शस्त्रागार में पेलेट गन शामिल नहीं है। इसी बीच पेलेट गन के उपयोग, कानूनी स्थिति और इससे जुड़े विवाद को लेकर बहस तेज हो गई है।
क्या होती है पेलेट गन?
पेलेट गन एक कम घातक (Less Lethal) हथियार मानी जाती है, जो एक कारतूस से बड़ी संख्या में छोटे धातु के छर्रे (Pellets) छोड़ती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। हालांकि इसे जानलेवा हथियारों की तुलना में कम घातक माना जाता है, लेकिन इसके छर्रे आंख, चेहरे और शरीर के संवेदनशील अंगों पर गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं।
किन परिस्थितियों में किया जाता है इस्तेमाल?
भारत में पेलेट गन का उपयोग सामान्य पुलिस कार्रवाई का हिस्सा नहीं है। इसका प्रयोग अतीत में विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में हिंसक भीड़ नियंत्रण के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा किया गया था। मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार इसका इस्तेमाल केवल तब किया जाता है, जब स्थिति सामान्य भीड़ नियंत्रण उपायों से बाहर हो जाए और सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो।
क्यों होता है इसका विरोध?
मानवाधिकार संगठनों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने समय-समय पर पेलेट गन के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे आंखों की स्थायी क्षति, गंभीर चोट और कुछ मामलों में स्थायी दृष्टिहानि तक हो सकती है। इसी कारण इसके उपयोग को लेकर लगातार बहस होती रही है और कम जोखिम वाले विकल्प अपनाने की मांग भी उठती रही है।
दिल्ली विवाद में क्या है स्थिति?
दिल्ली में हालिया छात्र आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पेलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक रूप से कहा कि उसके पास पेलेट गन उपलब्ध ही नहीं है और ऐसे आरोप निराधार हैं। वहीं रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की आंतरिक जांच शुरू की है।
जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
पेलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदर्शन के दौरान किस प्रकार के भीड़ नियंत्रण उपकरणों का उपयोग किया गया और क्या सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
