नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक है। यदि पात्र करदाता निर्धारित समय सीमा तक अपना ITR दाखिल नहीं करते हैं, तो उन्हें लेट फाइलिंग फीस, ब्याज और अन्य वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। आयकर विभाग ने समय पर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी है। फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम तिथि बढ़ाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
लेट फाइलिंग पर कितना लगेगा जुर्माना?
आयकर कानून के तहत समय सीमा के बाद ITR दाखिल करने पर धारा 234F के अंतर्गत लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ती है। यदि कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक है तो अधिकतम 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं 5 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं के लिए यह जुर्माना अधिकतम 1,000 रुपये है।
रिफंड मिलने में हो सकती है देरी
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर ITR दाखिल नहीं करने पर टैक्स रिफंड की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। देर से रिटर्न दाखिल करने वालों को रिफंड मिलने में अधिक समय लग सकता है। इसके अलावा कुछ मामलों में घाटे (Losses) को अगले वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ भी नहीं मिल पाता।
ब्याज का भी करना पड़ सकता है भुगतान
यदि करदाता पर कोई कर बकाया है और समय पर रिटर्न दाखिल नहीं किया जाता, तो लेट फीस के अलावा आयकर अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत ब्याज भी देना पड़ सकता है। इससे कुल कर देनदारी बढ़ सकती है।
अंतिम समय की जल्दबाजी से बचें
कर विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम दिन पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक रहने से तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए करदाताओं को समय रहते रिटर्न दाखिल करने के साथ ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी पूरी कर लेनी चाहिए, क्योंकि ई-वेरिफिकेशन के बिना ITR दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती।
समय पर ITR भरना क्यों जरूरी?
समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करने से न केवल जुर्माने और ब्याज से बचाव होता है, बल्कि बैंक लोन, वीजा आवेदन और अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं में भी ITR एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में काम आता है। इसलिए आयकर विभाग ने सभी पात्र करदाताओं से अंतिम तिथि से पहले अपना रिटर्न दाखिल करने की अपील की है।