Dollar Vs Rupee: रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, डॉलर के मुकाबले 96.16 तक गिरा, ईरान संकट और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली। भारतीय रुपये में मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया 48 पैसे टूटकर 96.16 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया।
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया।
सोमवार को रुपया 30 पैसे की गिरावट के साथ 95.68 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मंगलवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.95 के स्तर पर खुला और कारोबार के दौरान गिरकर 96.16 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया।
ईरान संकट से रुपये पर बढ़ा दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके कारण अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ी है और भारतीय रुपये समेत कई एशियाई मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर रुपये और देश के आयात बिल पर पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
कच्चा तेल महंगा होने पर भारतीय तेल कंपनियों को आयात भुगतान के लिए अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
96.16 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचा रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया मंगलवार को 95.95 रुपये प्रति डॉलर पर खुला।
कारोबार शुरू होने के बाद रुपये में गिरावट बढ़ी और यह 96.16 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले रुपये में 48 पैसे की कमजोरी दर्ज की गई।
RBI के हस्तक्षेप की उम्मीद
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की तेज गिरावट के बीच बाजार की नजर भारतीय रिजर्व बैंक के अगले कदम पर है।
बाजार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए RBI विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की बिक्री करके रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने का प्रयास करता है।
शेयर बाजार में भी गिरावट
रुपये की कमजोरी के साथ घरेलू शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 0.42 प्रतिशत गिरकर 77,294.12 अंक पर पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,144.60 अंक पर कारोबार कर रहा था।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बढ़ा है।
विदेशी निवेशकों ने बेचे 3,062 करोड़ रुपये के शेयर
शेयर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII सोमवार को शुद्ध बिकवाल रहे।
विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 3,062.27 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
डॉलर इंडेक्स 101.17 पर
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति बताने वाला डॉलर इंडेक्स 0.06 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 101.17 पर रहा।
इसके बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर मजबूत बना हुआ है।
महंगा डॉलर आम आदमी पर कैसे डालेगा असर?
रुपये में गिरावट का असर देश के आयात बिल और महंगाई पर पड़ सकता है।
भारत कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कई औद्योगिक उत्पाद विदेशों से आयात करता है।
डॉलर महंगा होने से इन वस्तुओं के आयात की लागत बढ़ती है।
इससे पेट्रोलियम उत्पादों, परिवहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयात आधारित वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
विदेश में पढ़ाई और यात्रा भी होगी महंगी
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले लोगों के खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।
विदेशी मुद्रा खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
विदेश में फीस, होटल, यात्रा और अन्य सेवाओं के भुगतान की लागत भी बढ़ सकती है।
आगे रुपये की चाल पर नजर
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब मध्य पूर्व के हालात, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख और RBI की रणनीति पर रहेगी।
यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेश की वापसी और RBI के हस्तक्षेप से रुपये को सहारा मिल सकता है।
फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपये का 96 के पार पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था, आयात लागत और महंगाई के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
