E20 पेट्रोल पर अरविंद केजरीवाल ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, पुराने वाहनों के लिए E10 का विकल्प देने समेत रखीं 5 मांगें
नई दिल्ली। देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 को लेकर जारी बहस के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने E20 पेट्रोल से वाहन मालिकों, खासकर पुराने वाहनों के उपयोगकर्ताओं को होने वाली कथित समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं।
केजरीवाल ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण संरक्षण है, लेकिन नई ईंधन नीति लागू करते समय करोड़ों वाहन मालिकों के हितों और उनकी आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प देने की मांग
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से मांग की है कि E20 के अनुकूल नहीं बनाए गए पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध रखा जाए।
उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, जिन्हें 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग के लिए डिजाइन नहीं किया गया था।
ऐसे वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी के अनुरूप पेट्रोल चुनने का विकल्प मिलना चाहिए।
पेट्रोल पंपों पर स्पष्ट लेबलिंग की मांग
केजरीवाल ने दूसरी मांग के रूप में देशभर के पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल की स्पष्ट लेबलिंग करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को ईंधन भरवाने से पहले जानकारी मिलनी चाहिए कि पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिला हुआ है।
इसके लिए पेट्रोल पंप, डिस्पेंसिंग मशीन और नोजल पर स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
वाहन मालिकों को नुकसान की भरपाई मिले
केजरीवाल ने E20 पेट्रोल के कारण वाहनों में तकनीकी खराबी या अन्य नुकसान होने की स्थिति में मुआवजे की व्यवस्था बनाने की मांग भी की है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन में नई ईंधन नीति के कारण इंजन, फ्यूल सिस्टम या अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ऐसे वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार को स्पष्ट मुआवजा नीति बनानी चाहिए।
E20 से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से E20 पेट्रोल के प्रभाव से जुड़े सभी अध्ययन, परीक्षण और आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि सरकार को वाहन की माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता, रखरखाव लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े आंकड़े जनता के सामने रखने चाहिए।
इससे उपभोक्ताओं को नई ईंधन नीति के लाभ और संभावित प्रभावों की सही जानकारी मिलेगी।
स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग
पत्र में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
केजरीवाल ने कहा कि इस समिति में ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों, पर्यावरण वैज्ञानिकों, उपभोक्ता संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए।
समिति E20 पेट्रोल के वाहनों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का स्वतंत्र अध्ययन करे और अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
E20 पेट्रोल को लेकर क्यों बढ़ रहा विवाद?
E20 पेट्रोल में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है।
केंद्र सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों को अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के उद्देश्य से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दिया है।
हालांकि, पुराने वाहनों की अनुकूलता, माइलेज में संभावित कमी और रखरखाव खर्च को लेकर वाहन मालिकों के बीच सवाल उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है मामला
E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है।
याचिका में पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल मिश्रण की स्पष्ट जानकारी देने, खरीद की रसीद पर एथेनॉल प्रतिशत दर्ज करने और पुराने वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
E20 को लेकर बढ़ती राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच अरविंद केजरीवाल का प्रधानमंत्री को लिखा पत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार का क्या है पक्ष?
केंद्र सरकार E20 पेट्रोल को देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण नीति के लिए महत्वपूर्ण कदम बताती रही है।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार और वाहन उद्योग से जुड़े संगठनों ने E20 के कारण बड़े स्तर पर इंजन खराब होने की आशंकाओं को भी खारिज किया है।
अब केंद्र सरकार के जवाब पर नजर
अरविंद केजरीवाल के पत्र के बाद E20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प, ईंधन की स्पष्ट लेबलिंग, वाहन मालिकों के लिए मुआवजा नीति, E20 से जुड़े आंकड़ों की सार्वजनिक जानकारी और स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की मांग पर अब केंद्र सरकार के रुख का इंतजार रहेगा।
फिलहाल E20 पेट्रोल की अनिवार्यता, उपभोक्ताओं के अधिकार और पुराने वाहनों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।
