नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से किए जाने संबंधी पुराने मानहानि मामले में अदालत ने गैरहाजिरी के बाद कार्रवाई करते हुए वारंट जारी किया है। मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद उस समय शुरू हुआ था जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र और चुनाव प्रचार के दौरान बजरंग दल के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। इसी संदर्भ में बजरंग दल की तुलना PFI से किए जाने पर संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने अदालत में मानहानि का मामला दायर किया था।
अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान खड़गे के निर्धारित तिथि पर अदालत में उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई पर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले में आगे की सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।
मानहानि का दावा
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित संगठन PFI से किए जाने से संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है। याचिका में कथित मानहानि के लिए क्षतिपूर्ति की भी मांग की गई है।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस पहले भी इस मामले में अपना पक्ष रख चुकी है। पार्टी का कहना है कि उसके चुनावी घोषणापत्र और नेताओं के बयान कानून व्यवस्था तथा सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में थे। मामले में अदालत के समक्ष विधिक प्रक्रिया जारी है।
कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी नजर
यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां अदालत मामले में आगे की प्रक्रिया तय करेगी। अदालत का अंतिम निर्णय आने तक आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।