देहरादून। श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय में व्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक समस्याओं को लेकर उत्तराखण्ड शासन के समक्ष मोर्चा खोल दिया है। विश्वविद्यालय परिवार की ओर से शासन को भेजे गए एक संयुक्त ज्ञापन में वरिष्ठ वित्त अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त किए जाने तथा उनके स्थान पर योग्य, अनुभवी और कार्यकुशल अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गई है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ वित्त अधिकारी की कार्यशैली के कारण विश्वविद्यालय में वित्तीय कार्य समयबद्ध तरीके से नहीं हो पा रहे हैं। शिक्षकों और कर्मचारियों ने कहा है कि वेतन, विभिन्न देयकों तथा अन्य वित्तीय भुगतानों में लगातार हो रही देरी से न केवल कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
भुगतानों में देरी से बढ़ा असंतोष
ज्ञापन के अनुसार विश्वविद्यालय में शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के कई महत्वपूर्ण भुगतान लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि जिन मामलों का निस्तारण समय पर होना चाहिए, उन्हें अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष का माहौल पैदा हो गया है और नियमित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
वित्तीय निर्णयों पर उठाए सवाल
विश्वविद्यालय परिवार ने शासन को अवगत कराया है कि कई महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई जा रही है। ज्ञापन में वित्तीय निर्णयों की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति विश्वविद्यालय के समग्र प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान का भी मुद्दा
ज्ञापन में आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान में हो रही देरी का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा विभिन्न वित्तीय अनुमोदनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लंबित रहने से कार्य संस्कृति प्रभावित होने की बात कही गई है। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय के वित्तीय संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक निर्णयों की विस्तृत जांच कराने की मांग भी शासन से की है।
विद्यार्थियों के हितों पर पड़ रहा असर
शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकता शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षा व्यवस्था, अनुसंधान कार्यों और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। उनका मानना है कि इसके लिए वित्तीय प्रशासन का पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध होना आवश्यक है। यदि वर्तमान स्थिति बनी रही तो इसका प्रभाव विश्वविद्यालय की विकास योजनाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
शासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग
संयुक्त ज्ञापन में शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्तराखण्ड शासन से विश्वविद्यालय की मौजूदा परिस्थितियों का गंभीरता से संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान वरिष्ठ वित्त अधिकारी को कार्यमुक्त कर उनके स्थान पर किसी निष्पक्ष, अनुभवी एवं विश्वविद्यालय हित में कार्य करने वाले अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हो सकें और विद्यार्थियों सहित समस्त कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
नोट: यह समाचार विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा उत्तराखण्ड शासन को भेजे गए ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और मांगों पर आधारित है। संबंधित वरिष्ठ वित्त अधिकारी या विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।