फर्जी दस्तावेजों से चोरी के ट्रकों का रजिस्ट्रेशन, देशभर में बिक्री का बड़ा नेटवर्क उजागर, 1,587 वाहन संदिग्ध

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नागपुर। महाराष्ट्र में चोरी के ट्रकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए दोबारा रजिस्टर कर देशभर में बेचने वाले बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। नागपुर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी RTO और पुलिस की जांच में 1,587 ट्रक संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें से 495 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

जांच में सामने आया है कि गिरोह चोरी के ट्रकों की पहचान बदलने के लिए फर्जी दस्तावेज, इंजन नंबर और चेसिस नंबर का इस्तेमाल करता था। इसके बाद वाहनों का अलग-अलग राज्यों में रजिस्ट्रेशन कराकर उन्हें बाजार में बेच दिया जाता था।

चोरी के ट्रकों की बदल दी जाती थी पहचान

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह पहले चोरी के ट्रकों को अपने कब्जे में लेता था। इसके बाद वाहनों के असली इंजन और चेसिस नंबर से छेड़छाड़ कर उनकी पहचान बदल दी जाती थी।

वाहनों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर ट्रकों का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराया जाता और फिर उन्हें वैध वाहन बताकर दूसरे राज्यों में बेच दिया जाता था।

नागपुर RTO की जांच में हुआ खुलासा

फर्जी ट्रक रजिस्ट्रेशन का मामला नागपुर RTO की जांच के दौरान सामने आया। दस्तावेजों और वाहनों के रिकॉर्ड की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिलने के बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।

इसके बाद पुलिस और परिवहन विभाग ने संयुक्त रूप से जांच का दायरा बढ़ाया। जांच के दौरान अलग-अलग राज्यों में रजिस्टर्ड बड़ी संख्या में वाहनों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए।

1,587 ट्रक जांच के दायरे में

जांच एजेंसियों ने अब तक 1,587 संदिग्ध ट्रकों की पहचान की है। इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, इंजन नंबर, चेसिस नंबर और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, 495 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। अधिकारियों को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध वाहनों की संख्या और बढ़ सकती है।

देशभर में फैला था नेटवर्क

जांच में संकेत मिले हैं कि फर्जी रजिस्ट्रेशन का यह नेटवर्क केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं था। चोरी के वाहनों को अलग-अलग राज्यों में भेजकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचा जाता था।

गिरोह से जुड़े लोग वाहन चोरी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, रजिस्ट्रेशन कराने और वाहनों की बिक्री तक अलग-अलग स्तर पर काम करते थे।

RTO अधिकारियों की भूमिका की भी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां पता लगा रही हैं कि इतने बड़े पैमाने पर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर वाहनों का रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ और क्या इस प्रक्रिया में विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत थी।

वाहन खरीदने वालों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचे गए ट्रक देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे हैं। ऐसे वाहनों को खरीदने वाले कई लोगों को वाहन चोरी का होने या दस्तावेज फर्जी होने की जानकारी नहीं होने की आशंका है।

जांच एजेंसियां वाहनों के वर्तमान मालिकों, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की भी जांच कर रही हैं।

बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

पुलिस और परिवहन विभाग अब पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटे हैं। जांच में वाहन चोरी करने वालों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों, दलालों और वाहनों को बेचने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद इस फर्जी रजिस्ट्रेशन नेटवर्क से जुड़े और लोगों तथा वाहनों का खुलासा हो सकता है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस और परिवहन विभाग संदिग्ध वाहनों के दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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