भारतीय सेना की मारक क्षमता होगी और मजबूत, 450 मल्टी रोल रॉकेट लॉन्चर खरीदने की तैयारी

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नई दिल्ली। भारतीय सेना अपनी तोपखाना क्षमता और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सेना करीब 450 मल्टी रोल रॉकेट लॉन्चर खरीदने की तैयारी में है। इन आधुनिक रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को अलग-अलग दूरी और क्षमता वाले रॉकेट दागने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने इस खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन यानी RFI जारी किया है। सेना की योजना इन रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को देश के अलग-अलग सामरिक क्षेत्रों में तैनात करने की है।

एक ही लॉन्चर से दागे जा सकेंगे अलग-अलग रॉकेट

मल्टी रोल रॉकेट लॉन्चर की प्रमुख विशेषता इसकी बहुउद्देश्यीय क्षमता है। यह सिस्टम अलग-अलग कैलिबर, रेंज और मारक क्षमता वाले रॉकेट दागने में सक्षम होगा।

इससे सेना को युद्ध की परिस्थितियों और लक्ष्य की दूरी के अनुसार उपयुक्त हथियार चुनने में मदद मिलेगी। एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए दुश्मन के सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर, हथियार भंडार और अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला किया जा सकेगा।

मोबाइल प्लेटफॉर्म पर तैनात होंगे लॉन्चर

भारतीय सेना ऐसे रॉकेट लॉन्चर सिस्टम चाहती है, जिन्हें हाई मोबिलिटी वाले वाहन पर तैनात किया जा सके।

मोबाइल प्लेटफॉर्म पर तैनाती से लॉन्चर तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच सकेंगे। फायरिंग के बाद अपनी स्थिति बदलने की क्षमता से दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचने में भी मदद मिलेगी।

सटीक निशाना लगाने की क्षमता पर जोर

प्रस्तावित मल्टी रोल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम में आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम, नेविगेशन तकनीक और डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम शामिल किए जाने की अपेक्षा है।

इन तकनीकों की मदद से लक्ष्य की पहचान, रॉकेट लॉन्च करने की प्रक्रिया और हमले की सटीकता में सुधार होगा।

भारतीय सेना की जरूरतों के अनुसार सिस्टम को दिन और रात के साथ अलग-अलग मौसम तथा भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन योग्य होना होगा।

लंबी दूरी के लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता

भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। मल्टी रोल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम सेना को सीमा से दूर मौजूद रणनीतिक लक्ष्यों पर हमला करने की अतिरिक्त क्षमता प्रदान करेंगे।

ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों, तोपखाना इकाइयों, रसद केंद्रों और कमांड एवं कंट्रोल सुविधाओं को निशाना बनाने में किया जाता है।

मेक इन इंडिया को मिल सकता है बढ़ावा

रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की खरीद प्रक्रिया में स्वदेशी रक्षा कंपनियों की भागीदारी पर भी जोर दिए जाने की उम्मीद है।

सरकार रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में हथियार प्रणालियों के विकास और निर्माण को बढ़ावा दे रही है।

भारतीय कंपनियां विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए भी इस खरीद प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती हैं।

पिनाका और दूसरे रॉकेट सिस्टम से बढ़ रही सेना की ताकत

भारतीय सेना पहले से पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। इसके अलावा सेना लंबी दूरी तक हमला करने वाले नए रॉकेट सिस्टम और गोला-बारूद की खरीद भी आगे बढ़ा रही है।

हाल के वर्षों में सेना ने अपनी डीप स्ट्राइक क्षमता मजबूत करने के लिए कई स्वदेशी और आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल करने की प्रक्रिया तेज की है। जनवरी 2026 में सेना ने 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से जुड़े उपकरण और गोला-बारूद की खरीद के लिए 292 करोड़ रुपये से अधिक का अनुबंध भी किया था।

चीन और पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगी सैन्य क्षमता

नई रॉकेट लॉन्चर प्रणालियों की खरीद से भारतीय सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।

पहाड़ी, रेगिस्तानी और मैदानी क्षेत्रों में तेजी से तैनाती की क्षमता के कारण इन सिस्टम का इस्तेमाल अलग-अलग सैन्य मोर्चों पर किया जा सकेगा।

सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम

भारतीय सेना लगातार तोपखाना, मिसाइल, एयर डिफेंस और निगरानी प्रणालियों को आधुनिक बना रही है। हाल ही में रक्षा खरीद परिषद ने थल सेना, नौसेना और वायु सेना की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए करीब 52 हजार करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी थी।

450 मल्टी रोल रॉकेट लॉन्चर की प्रस्तावित खरीद को सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता, गतिशीलता और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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