केदारनाथ एसटीपी में खामियां, सीपीसीबी ने कार्रवाई के दिए निर्देश
यात्रा मार्ग पर लगे करीब 1,000 टेंट एसटीपी के दायरे से बाहर, बिना उपचार गंदा पानी मंदाकिनी में जा रहा
देहरादून: केदारनाथ में निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने गंभीर खामियां उजागर की हैं। सीपीसीबी ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) को पत्र लिखकर बताया कि यह एसटीपी यात्रा मार्ग पर लगे करीब 1,000 टेंटों को कवर नहीं करता, जिनमें हजारों तीर्थयात्री ठहरते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, यह एसटीपी करीब 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है और इसे लगभग 5,000 की स्थायी आबादी तथा 20,000 की अस्थायी (फ्लोटिंग) आबादी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। लेकिन नगर पंचायत के दायरे से बाहर स्थित टेंटों और अस्थायी ढांचों में ठहरने वाले करीब 10,000 तीर्थयात्रियों से निकलने वाले सीवेज को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
सीपीसीबी ने अपने पत्र में कहा कि नगर पंचायत सीमा से बाहर राजस्व गांवों में स्थित टेंट क्षेत्रों के लिए अलग से कोई एसटीपी व्यवस्था नहीं है। इसके चलते इन क्षेत्रों से निकलने वाला बिना उपचारित गंदा पानी सीधे मंदाकिनी नदी में बह रहा है, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।
यूकेपीसीबी के पर्यावरण अभियंता राकेश कंडारी ने बताया कि केंद्रीय बोर्ड द्वारा उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लिया गया है और परियोजना पर काम कर रही स्थानीय जल संस्थान इकाई को आवश्यक सुधार के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष एसटीपी की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव भी भेजा गया था।
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में यह भी सामने आया था कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा ने केंद्रीकृत एसटीपी की सीमा से बाहर के क्षेत्रों के लिए विकेंद्रीकृत अपशिष्ट जल प्रबंधन समाधान सुझाए थे। यह मामला फिलहाल राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 23 फरवरी को होनी है।
इस बीच, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा केदारनाथ धाम की कैरींग कैपेसिटी स्टडी पूरी कर ली गई है और इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इसके निष्कर्ष 16 फरवरी को प्रस्तुत किए जाएंगे।
एसटीपी को पहले 2025 की यात्रा से पहले पूरा किया जाना था, लेकिन अब अधिकारियों को उम्मीद है कि यह इस वर्ष की केदारनाथ यात्रा शुरू होने से पहले तैयार हो जाएगा।
