Bhojshala Case: मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट, MP हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर नोटिस जारी

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक विवाद में नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है।

शीर्ष अदालत ने याचिकाओं पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था और परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति देने वाली भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की पुरानी व्यवस्था को रद्द कर दिया गया था।

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का किया रुख

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष से जुड़े संगठनों और व्यक्तियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत से इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की है।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि भोजशाला-कमाल मौला परिसर में लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है और हाईकोर्ट के फैसले से उनके धार्मिक अधिकार प्रभावित हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया है।

शीर्ष अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अंतिम फैसले को निरस्त नहीं किया है।

क्या था मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को भोजशाला-कमाल मौला परिसर से जुड़े विवाद पर अपना फैसला सुनाया था।

हाईकोर्ट ने परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना था।

इसके साथ ही अदालत ने ASI के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति थी।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी दी थी।

मुस्लिम पक्ष ने फैसले पर जताई आपत्ति

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया था।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि कमाल मौला मस्जिद का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है तथा लंबे समय से वहां शुक्रवार की नमाज अदा की जाती रही है।

इसी आधार पर मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट रही महत्वपूर्ण

भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर जारी विवाद के बीच मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में ASI को वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था।

ASI ने परिसर का सर्वेक्षण करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश की थी।

इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों पर विचार करते हुए मई 2026 में फैसला सुनाया।

क्या है भोजशाला-कमाल मौला विवाद?

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक है।

हिंदू पक्ष भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर और राजा भोज से जुड़ा ऐतिहासिक शिक्षा केंद्र मानता है।

मुस्लिम पक्ष परिसर को कमाल मौला मस्जिद के रूप में धार्मिक महत्व वाला स्थल बताता रहा है।

इसी धार्मिक और ऐतिहासिक दावे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है।

पुरानी व्यवस्था में दोनों समुदाय करते थे पूजा और नमाज

ASI की पुरानी व्यवस्था के तहत हिंदू समुदाय को मंगलवार के दिन भोजशाला परिसर में पूजा करने की अनुमति थी।

मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।

बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समुदाय को विशेष पूजा की अनुमति मिलती थी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह व्यवस्था बदल गई और मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद भोजशाला विवाद एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

अब संबंधित पक्षों को शीर्ष अदालत के सामने अपना जवाब और कानूनी पक्ष रखना होगा।

मामले की अगली सुनवाई में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले, ASI की रिपोर्ट, परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप और दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर बहस होने की संभावना है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। अब शीर्ष अदालत के अंतिम फैसले पर सभी की नजर रहेगी।

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