यूपी MLC चुनाव में आज प्रचार का आखिरी दिन, 23 अक्टूबर को वोटिंग; भाजपा-सपा के बीच कड़ा मुकाबला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बुधवार शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा, जबकि 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। मतों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा और समाजवादी पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
भाजपा के लिए सीटें बढ़ाने की चुनौती, सपा की नजर पुराने प्रदर्शन पर
विधान परिषद की इन सीटों पर मुकाबला भाजपा और सपा के बीच दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। पिछले चुनाव में सपा ने छह और भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं। इस बार भाजपा अपने प्रदर्शन में सुधार करने की कोशिश कर रही है, जबकि सपा के सामने अपनी पिछली बढ़त बरकरार रखने की चुनौती है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रचार की जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, आगरा और गाजियाबाद समेत कई जिलों में जनसभाएं कर पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में माहौल बनाने का प्रयास किया। दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के सांसदों और विधायकों के साथ जिला व महानगर स्तर के पदाधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी है।
विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के लिए बड़ा संकेत
एमएलसी चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत परखने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि यह चुनाव सीमित सीटों पर हो रहा है, लेकिन इसके नतीजों को लेकर भाजपा और सपा दोनों की दिलचस्पी बढ़ी हुई है। इस चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान होना भी राजनीतिक चर्चा का विषय है। इसके अलावा शिक्षक और स्नातक मतदाताओं का रुख भी अहम माना जा रहा है। इन मतदाताओं के बीच किस पार्टी को कितना समर्थन मिलता है, इसे प्रदेश के राजनीतिक माहौल के संकेत के रूप में देखा जा सकता है।
पांच स्नातक और छह शिक्षक सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कुल 11 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। इनमें पांच सीटें स्नातक निर्वाचन खंड और छह सीटें शिक्षक निर्वाचन खंड की हैं। स्नातक निर्वाचन खंड में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी की सीटें शामिल हैं। वहीं, शिक्षक निर्वाचन खंड में लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की सीटों पर मतदान होगा। इन निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस कारण चुनाव का दायरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक फैला हुआ है।
27 अक्टूबर को खुलेगा प्रत्याशियों की किस्मत का पिटारा
बुधवार शाम प्रचार समाप्त होने के बाद प्रत्याशी और राजनीतिक दल मतदान की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। 23 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम सामने आएंगे। अब सभी की निगाहें मतदान पर टिकी हैं। चुनाव परिणाम बताएंगे कि भाजपा अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने में सफल होती है या समाजवादी पार्टी पिछली जीत का सिलसिला कायम रखती है। दोनों दलों के लिए यह मुकाबला विधान परिषद में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का अहम मौका है।
