चारधाम यात्रा में 271 श्रद्धालुओं की मौत, बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य इंतजामों पर सवाल

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60 लाख से अधिक यात्रियों ने किए दर्शन, केदारनाथ में सबसे ज्यादा 132 श्रद्धालुओं की गई जान

देहरादून। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 21 अक्टूबर की सुबह तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। लेकिन यात्रा के दौरान 271 श्रद्धालुओं की मौत का आंकड़ा भी सामने आया है। इससे यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं, मेडिकल स्क्रीनिंग और आपातकालीन उपचार की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को हुई थी। यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी सामने आई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 21 अक्टूबर सुबह 10 बजे तक चारों धामों में 271 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी थी। इस आंकड़े में यात्रा मार्गों पर दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोग शामिल नहीं हैं।

केदारनाथ में सबसे ज्यादा मौतें

धामवार आंकड़ों पर नजर डालें तो केदारनाथ में सबसे अधिक 132 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई। बदरीनाथ में 85, यमुनोत्री में 34 और गंगोत्री में 20 श्रद्धालुओं की जान गई। इस तरह चारों धामों में मृतकों की कुल संख्या 271 हो गई है। केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौतों की अधिक संख्या स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए चुनौती बनी हुई है।

ऊंचाई और हृदय रोग से बढ़ता जोखिम

चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कम ऑक्सीजन, ठंड, मौसम में बदलाव और कठिन चढ़ाई जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच, डॉक्टर की सलाह और यात्रा के दौरान पर्याप्त आराम महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य सुविधाओं के बावजूद क्यों नहीं थम रहा मौतों का आंकड़ा?

चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले स्वास्थ्य केंद्रों, मेडिकल स्क्रीनिंग और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद मौतों की संख्या को देखते हुए यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि गंभीर स्थिति में श्रद्धालुओं को कितनी जल्दी उपचार मिल रहा है और दुर्गम क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता कितनी प्रभावी है। बदरीनाथ के पुजारी समुदाय से जुड़े आशुतोष ने भी मौतों के आंकड़ों को चिंता का विषय बताते हुए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया।

पिछले वर्षों में भी सामने आए मौतों के मामले

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चारधाम यात्रा के दौरान वर्ष 2022 में 311, वर्ष 2023 में 245, वर्ष 2024 में 246 और वर्ष 2025 में 218 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई थी। इस वर्ष 21 अक्टूबर सुबह तक 271 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी थी।

स्वास्थ्य विभाग ने श्रद्धालुओं से की अपील

स्वास्थ्य विभाग के सचिव विनय शंकर पांडे के मुताबिक, केदारनाथ और बदरीनाथ में अस्पताल संचालित हैं और यात्रा मार्गों पर अलग-अलग स्थानों पर स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं। उन्होंने बताया कि मृतकों में हृदय रोग से पीड़ित श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही है। उन्होंने यात्रियों से यात्रा पर आने से पहले स्वास्थ्य जांच कराने और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही यात्रा करने की अपील की। चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। समय पर उपचार, प्रभावी निगरानी और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मौतों के सभी मामलों को मेडिकल एडवाइजरी की अनदेखी से जोड़ना उचित नहीं होगा, क्योंकि प्रत्येक मामले के कारण अलग हो सकते हैं।

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