नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की रकम को लेकर उठे विवाद के बीच एक नया अपडेट सामने आया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले करीब ₹3,300 करोड़ की रकम का स्वतंत्र ऑडिट कराया गया है। ऑडिट में किसी बड़े वित्तीय घोटाले या ट्रस्ट के खातों में सिस्टम स्तर की वित्तीय अनियमितता के प्रमाण नहीं मिले हैं।
मैनुअल कैश सॉर्टिंग के दौरान हुई चोरी
रिपोर्ट के अनुसार, जिस चोरी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, वह ट्रस्ट के मुख्य बैंक खातों से रकम गायब होने का मामला नहीं था। सरकारी सूत्रों का दावा है कि दान पेटियों से निकली नकदी को मशीन से गिनने से पहले मैनुअल तरीके से अलग-अलग करने की प्रक्रिया के दौरान चोरी हुई।
कैश काउंटिंग की प्रक्रिया में लगे कुछ कर्मचारियों पर नकदी निकालने का आरोप है। इस प्रक्रिया में SBI और सिक्योरिटी एजेंसी के बीच व्यवस्था थी। एजेंसी के कर्मचारियों की जिम्मेदारी नकदी की छंटाई, गिनती और बैंक में जमा कराने तक की प्रक्रिया से जुड़ी थी।
₹1,800 करोड़ मंदिर निर्माण पर खर्च
सरकारी सूत्रों के अनुसार, करीब ₹1,800 करोड़ मंदिर निर्माण पर खर्च किए गए। लगभग ₹400 करोड़ जमीन अधिग्रहण पर खर्च हुए। इन बड़े भुगतान में बैंकिंग माध्यम का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। ऑडिट में इन लेन-देन का रिकॉर्ड उपलब्ध होने का दावा किया गया है।
ऑडिट फर्म ने की वित्तीय जांच
करीब ₹3,300 करोड़ की रकम का बाहरी ऑडिट M/s V. Shankar Aiyer & Co. ने किया। ऑडिट में ट्रस्ट की आय, खर्च और प्रमुख वित्तीय लेन-देन की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े वित्तीय लेन-देन में नकद भुगतान के बजाय बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल किया गया।
चोरी के मामले में जांच जारी
दान पेटियों से नकदी चोरी और कथित अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियां पहले से कार्रवाई कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, SIT की जांच के आधार पर अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। जांच में CCTV फुटेज, वित्तीय दस्तावेज और बरामदगी जैसे साक्ष्यों को आधार बनाया गया है।
ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव
विवाद के बीच ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे और नई जिम्मेदारियों को लेकर भी बदलाव किए गए हैं।
इस ऑडिट अपडेट से फिलहाल यह तस्वीर सामने आती है कि करीब ₹3,300 करोड़ की ट्रस्ट राशि के मुख्य वित्तीय रिकॉर्ड में बड़े घोटाले का प्रमाण नहीं मिला है। वहीं, नकदी की मैनुअल छंटाई के दौरान हुई कथित चोरी की जांच अलग से जारी है।