नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम कदम उठाया। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के खिलाफ दाखिल अपीलों के निपटारे की जानकारी मांगी है।
अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर आया है। याचिका में पश्चिम बंगाल के प्रत्येक ब्लॉक में SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने और अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करने की मांग की गई है।
ECI से अपीलों का पूरा ब्यौरा मांगा
शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग से पूछा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने अपील की और उनमें से कितनी अपीलों का निपटारा हो चुका है। अदालत लंबित मामलों की संख्या की जानकारी भी चाहती है।
पहले भी बनाई गई थी अपीलीय व्यवस्था
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्वतंत्र अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश दिया था। इन ट्रिब्यूनलों में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को जिम्मेदारी दी गई। अदालत ने SIR से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की व्यवस्था भी की थी।
ड्राफ्ट सूची में 58.20 लाख नाम बाहर
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 58.20 लाख नाम बाहर हैं। SIR से पहले राज्य की मतदाता सूची में करीब 7.66 करोड़ मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट सूची में करीब 7.08 करोड़ नाम शामिल किए गए।
अब आयोग के जवाब पर नजर
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब चुनाव आयोग को SIR से जुड़े मामलों और अपीलों के निपटारे का विस्तृत ब्यौरा देना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई में आयोग के जवाब के आधार पर अदालत आगे के निर्देश जारी कर सकती है।