नई दिल्ली। महिला आरक्षण को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच चल रही बहस में अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम भी शामिल हो गए हैं। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर इसके लागू होने में देरी की जा रही है।
चिदंबरम ने रिजिजू के बयान को बताया गलत
पी. चिदंबरम ने कहा कि किरेन रिजिजू का यह कहना सही नहीं है कि महिला आरक्षण 2034 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू नहीं हो सकता। उनके अनुसार, संविधान के 106वें संशोधन के तहत महिला आरक्षण का प्रावधान पहले से कानून का हिस्सा है।
राहुल गांधी भी उठा चुके हैं सवाल
इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार को घेरा है। राहुल गांधी का कहना है कि महिला आरक्षण कानून संसद से पारित हो चुका है और इसे बिना किसी अतिरिक्त शर्त के लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने की जरूरत क्यों है।
रिजिजू का तर्क क्या है?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है कि महिला आरक्षण कानून का क्रियान्वयन परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। सरकार के अनुसार, 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आरक्षण प्रभावी हो सकेगा।
चिदंबरम ने सरकार पर लगाया छिपे एजेंडे का आरोप
चिदंबरम ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना केंद्र सरकार की सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध को हटाया जाता है तो महिलाओं के लिए आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सकता है।
2023 में संसद से पारित हुआ था कानून
महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन 2023 में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए करीब एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
परिसीमन पर भी जारी है विवाद
महिला आरक्षण के साथ परिसीमन का मुद्दा भी राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि परिसीमन की प्रक्रिया को आधार बनाकर महिला आरक्षण को टाला जा रहा है। सरकार का पक्ष है कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार परिसीमन और आरक्षण के प्रावधानों को अलग नहीं किया जा सकता।
फिलहाल महिला आरक्षण के क्रियान्वयन की समयसीमा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद कायम हैं। संसद में इस मुद्दे पर आगे भी राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।