‘ये हमारे बच्चे हैं, दुश्मन नहीं’— प्रियंका गांधी का केंद्र पर हमला, संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा
नई दिल्ली। ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस महासचिव एवं सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार को युवाओं की बात सुननी चाहिए, न कि उन्हें डराने या दबाने की कोशिश करनी चाहिए।
‘ये हमारे बच्चे हैं, इनकी आवाज सुनिए’
प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र देश का भविष्य हैं और उन्हें अपराधियों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “ये हमारे बच्चे हैं, दुश्मन नहीं। इनकी बात सुनिए और इनके सवालों का जवाब दीजिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवाद के बजाय पुलिस बल का सहारा ले रही है, जो लोकतंत्र के लिए उचित संदेश नहीं है।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
सोमवार को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़े। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और झड़प की घटनाएं भी सामने आईं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं की मांगों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और संसद परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल
‘चलो संसद’ मार्च का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक की घटनाओं पर जवाबदेही तय करना है। आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है। इस बीच सरकार की ओर से आंदोलनकारियों के साथ बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा जारी है।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
प्रियंका गांधी के बयान के बाद संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष छात्रों के समर्थन में सरकार पर दबाव बना रहा है, वहीं केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सियासी गलियारों में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
