जन्मदिन नहीं मनाएंगे मल्लिकार्जुन खरगे, बोले- छात्रों की आवाज़ का जवाब लाठियों से दिया जा रहा है
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस वर्ष अपना जन्मदिन सार्वजनिक रूप से नहीं मनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देशभर के छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और उनकी आवाज़ का जवाब पुलिस कार्रवाई से दिया जा रहा है, तब उत्सव मनाना उचित नहीं है। खरगे ने छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए।
छात्रों के समर्थन में लिया फैसला
खरगे ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार का रवैया चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया जा रहा है, जबकि सरकार को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से बड़ा है। उनका कहना था कि यदि छात्र अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, तो सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि दमनात्मक कार्रवाई का। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।
विपक्ष ने भी जताया विरोध
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल संसद मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार असहमति की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संसद परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
जन्मदिन पर नहीं होगा कोई सार्वजनिक कार्यक्रम
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि वे इस बार जन्मदिन पर किसी प्रकार का सार्वजनिक समारोह आयोजित न करें। उन्होंने कहा कि यह समय छात्रों और युवाओं के साथ एकजुटता दिखाने का है।
संसद सत्र के बीच बढ़ा सियासी तापमान
मानसून सत्र के दौरान छात्रों के आंदोलन, NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे में खरगे का जन्मदिन न मनाने का फैसला भी राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संसद के भीतर और बाहर इन मुद्दों पर बहस और तेज होने की संभावना है।
