राम मंदिर दान गड़बड़ी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को SIT के पुनर्गठन पर विचार करने को कहा, 27 जुलाई को अगली सुनवाई
नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को विशेष जांच दल (SIT) के पुनर्गठन पर आवश्यक निर्देश लेने को कहा। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय होनी चाहिए। अदालत ने अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है।
SIT के पुनर्गठन पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का संदेह नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार को मौजूदा SIT के पुनर्गठन के संबंध में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने और अदालत को अवगत कराने को कहा गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
राजनीति से दूर रखने की नसीहत
शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों से इस मामले का राजनीतिकरण न करने की भी सलाह दी। अदालत ने कहा कि यह एक कथित आपराधिक जांच का विषय है और इसकी जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।
SIT ने सौंपी प्रगति रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित SIT ने जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। रिपोर्ट में अब तक की जांच, पूछताछ और एकत्र किए गए साक्ष्यों की जानकारी दी गई है। अदालत ने रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए आगे की जांच प्रक्रिया पर नजर बनाए रखने की बात कही।
ट्रस्ट और सरकार से भी मांगा गया पक्ष
मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से भी जवाब मांगा गया है। अदालत सभी पक्षों के जवाब और जांच की प्रगति का अध्ययन करने के बाद अगली सुनवाई में आगे की दिशा तय करेगी।
27 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
राम मंदिर दान से जुड़े इस मामले पर अब सभी की नजर 27 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर है। माना जा रहा है कि उस दिन अदालत SIT के पुनर्गठन, जांच की प्रगति और आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़नी चाहिए।
