‘हमारा समय बर्बाद मत कीजिए’… छात्रों पर पुलिस कार्रवाई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, दिल्ली हाईकोर्ट करेगा याचिका पर विचार

0
supreme-court-of-india-1591946797-1650874393

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि इस मामले में वह स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) नहीं ले सकती और टिप्पणी की कि “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए”। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को उचित कानूनी मंच का रुख करने की सलाह दी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेने से किया इनकार

याचिका में आरोप लगाया गया था कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। याचिकाकर्ता ने अदालत से वीडियो और अन्य सामग्री के आधार पर स्वत: संज्ञान लेने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस प्रकार की याचिकाओं के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट में होगी मामले की सुनवाई

इस बीच, इसी मुद्दे से जुड़ी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। हाईकोर्ट में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान अपनाए गए तरीकों को चुनौती दी गई है। अदालत इस मामले में याचिकाकर्ताओं और संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी।

छात्र आंदोलन बना राष्ट्रीय मुद्दा

NEET परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। विपक्षी दल लगातार पुलिस कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे।

कानूनी लड़ाई जारी

सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अब इस मामले की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिक गई हैं। यदि हाईकोर्ट मामले में विस्तृत सुनवाई करता है, तो छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक निर्णय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्नों पर न्यायिक समीक्षा हो सकती है।

आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया साथ-साथ

छात्र संगठनों ने कहा है कि वे अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखेंगे और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखते हैं। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और संसद में इस मुद्दे पर होने वाली बहस पर सभी की नजरें रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ये समाचार भी पढ़ें :