राम मंदिर दान घोटाला: सुनसान जगह पर होती थीं आरोपियों की बैठकें, ऐसे बांटी जाती थी कथित चोरी की रकम
अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर दान राशि में कथित गबन मामले की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। विशेष जांच दल (SIT) की जांच में सामने आया है कि मामले में गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर सुनसान स्थानों पर मिलते थे और वहीं चोरी की गई रकम का बंटवारा करते थे। जांच एजेंसियां अब इन बैठकों में शामिल लोगों की भूमिका और कथित मनी ट्रेल की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोपी मंदिर परिसर से दान राशि निकालने के बाद सीधे उसका उपयोग नहीं करते थे। कथित तौर पर पहले एक तय स्थान पर सभी इकट्ठा होते थे, जहां नकदी का हिसाब लगाया जाता था और फिर आपस में रकम बांटी जाती थी। SIT इन स्थानों की पहचान करने और वहां मौजूद संभावित साक्ष्यों को जुटाने में लगी है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरी गतिविधि सुनियोजित तरीके से संचालित की जा रही थी। इसी वजह से पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन बैठकों में कौन-कौन लोग शामिल होते थे।
इससे पहले जांच में यह भी सामने आया था कि कथित चोरी उजागर होने से पहले मंदिर के बैंक खातों में प्रतिदिन लगभग 16 से 18 लाख रुपये जमा हो रहे थे, जबकि मामला सामने आने और निगरानी बढ़ने के बाद यही राशि बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन हो गई। इसी अंतर के आधार पर SIT को संदेह है कि लंबे समय से प्रतिदिन लाखों रुपये की कथित हेराफेरी हो रही थी।
मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और कथित मनी ट्रेल की भी जांच कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कथित गबन में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
उधर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें जांच की प्रगति, प्रारंभिक रिपोर्ट और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
