पुरुष आयोग की मांग फिर चर्चा में, संसद में पेश हो चुका है विधेयक, जानिए क्या है पूरा मामला

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नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय पुरुष आयोग (National Commission for Men) के गठन की मांग एक बार फिर चर्चा में है। हाल के दिनों में कुछ चर्चित मामलों और पुरुष अधिकारों से जुड़े संगठनों की मांग के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आया है। इस बीच राज्यसभा में पुरुष आयोग के गठन से संबंधित एक निजी सदस्य विधेयक भी पेश किया गया है, जिसने इस बहस को नई गति दी है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, राष्ट्रीय पुरुष आयोग का उद्देश्य पुरुषों से जुड़े मामलों की सुनवाई, शिकायतों की जांच, नीतिगत सुझाव देना और पुरुषों के अधिकारों एवं कल्याण से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सिफारिशें करना होगा। हालांकि, यह एक निजी सदस्य विधेयक है और अभी इसे संसद से मंजूरी नहीं मिली है।

कब शुरू हुई थी मांग?

पुरुष आयोग की मांग नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से कुछ सामाजिक संगठन और पुरुष अधिकार कार्यकर्ता इस तरह के आयोग की स्थापना की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि घरेलू विवाद, मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या, बाल अभिरक्षा (Child Custody) और कुछ कानूनों के कथित दुरुपयोग जैसे मामलों में पुरुषों के लिए भी एक संस्थागत व्यवस्था होनी चाहिए।

मांग को फिर क्यों मिली चर्चा?

हाल के कुछ चर्चित मामलों के बाद पुरुष आयोग की मांग फिर तेज हुई है। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने राष्ट्रीय पुरुष आयोग विधेयक संसद में पेश किया। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं, बच्चों और अन्य वर्गों के लिए वैधानिक आयोग हैं, तो पुरुषों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए भी एक संस्थागत तंत्र पर विचार होना चाहिए।

समर्थक और विरोधी क्या कहते हैं?

पुरुष आयोग के समर्थकों का कहना है कि इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों का विरोध करना नहीं, बल्कि पुरुषों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक अलग मंच उपलब्ध कराना है। वहीं, कुछ महिला अधिकार संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कानूनों और संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए तथा किसी नए आयोग की आवश्यकता पर व्यापक विमर्श जरूरी है।

सरकार की क्या है स्थिति?

फिलहाल केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। संसद में पेश निजी सदस्य विधेयक पर आगे की प्रक्रिया सदन की कार्यवाही और सरकार के रुख पर निर्भर करेगी। ऐसे में आयोग के गठन को लेकर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

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