NMC के नए ड्राफ्ट नियमों से मेडिकल शिक्षा में बड़ा बदलाव संभव, निजी कंपनियां भी खोल सकेंगी मेडिकल कॉलेज; फीस को लेकर बढ़ी चर्चा

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नई दिल्ली। देश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से जुड़े नियमों में संशोधन का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी किया है। प्रस्तावित बदलावों के तहत पहली बार लाभ कमाने वाली (For-Profit) निजी कंपनियों को भी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की अनुमति देने का रास्ता खुल सकता है। यदि इन संशोधनों को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो भारत में मेडिकल शिक्षा के ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

निजी कंपनियों के लिए खुल सकता है रास्ता

मौजूदा व्यवस्था में मेडिकल कॉलेज मुख्य रूप से ट्रस्ट, सोसायटी या गैर-लाभकारी संस्थाओं द्वारा संचालित किए जाते हैं। नए ड्राफ्ट नियमों में कंपनियों को भी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। सरकार और NMC का मानना है कि इससे मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ेगी, निवेश आएगा और देश में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर होगी।

फीस को लेकर उठे सवाल

ड्राफ्ट नियम सामने आने के बाद मेडिकल शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों ने फीस को लेकर चिंता जताई है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि यदि लाभ कमाने वाली कंपनियां मेडिकल कॉलेज चलाएंगी, तो कुछ संस्थानों में शुल्क बढ़ सकता है। हालांकि NMC के मौजूदा नियमों के अनुसार निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में कम-से-कम 50 प्रतिशत सीटों की फीस नियामकीय व्यवस्था के दायरे में रहती है।

मेडिकल सीटें बढ़ाने पर सरकार का जोर

केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से देश में मेडिकल सीटों और कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है। हाल ही में NMC ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लगभग 9,900 नई MBBS सीटों को मंजूरी दी है, जिससे देश में कुल MBBS सीटों की संख्या 1.36 लाख से अधिक हो गई है।

गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा: NMC

NMC ने हाल के दिनों में मेडिकल कॉलेजों के लिए कई सख्त प्रस्ताव भी जारी किए हैं। इनमें अधूरे अस्पताल या शैक्षणिक भवन होने पर MBBS सीटें बढ़ाने की अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव शामिल है। आयोग का कहना है कि मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

अभी अंतिम फैसला नहीं

NMC ने स्पष्ट किया है कि यह केवल ड्राफ्ट संशोधन है और इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। इसलिए फिलहाल निजी कंपनियों को मेडिकल कॉलेज खोलने की व्यवस्था लागू नहीं हुई है।

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या और MBBS सीटों में तेजी से वृद्धि हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, सरकार और NMC के सामने यह चुनौती भी होगी कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और फीस नियंत्रण के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। यही कारण है कि इस प्रस्ताव पर मेडिकल शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

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