मानसून सत्र से पहले NDA की रणनीति तैयार, पांच अहम विधेयकों पर सरकार का फोकस; संसद में विपक्ष को घेरने की तैयारी
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी संसदीय रणनीति को अंतिम रूप देने की कवायद तेज कर दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित रणनीतिक बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, सहयोगी दलों के समन्वय और विपक्ष के संभावित मुद्दों का जवाब देने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में आगामी मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले पांच प्रमुख विधेयकों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। सरकार का लक्ष्य महत्वपूर्ण आर्थिक, प्रशासनिक और संस्थागत सुधारों से जुड़े विधेयकों को संसद से पारित कराना है।
इन विधेयकों पर रहेगा सरकार का जोर
सरकारी एजेंडे में जिन प्रमुख विधेयकों को शामिल किया गया है, उनमें आयकर (संशोधन) विधेयक-2026, एमएसएमई सुधार विधेयक, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), उच्च शिक्षा से जुड़े सुधार विधेयक तथा जन्म एवं नागरिक पंजीकरण से संबंधित संशोधन विधेयक प्रमुख हैं। इसके अलावा कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सहयोगी दलों के साथ समन्वय पर जोर
बैठक में एनडीए के सभी सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया। सरकार चाहती है कि सदन के भीतर सभी सहयोगी दल एकजुट होकर विधायी कार्यों को आगे बढ़ाएं और विपक्ष के हमलों का प्रभावी जवाब दें।
विपक्ष भी बना रहा रणनीति
मानसून सत्र से पहले विपक्षी दल भी अपनी संयुक्त रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। विपक्षी गठबंधन के नेताओं की बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे के साथ-साथ विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों को संसद में उठाने पर विचार किया जाएगा।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे और अन्य राजनीतिक विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में इस बार का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं।
सर्वदलीय बैठक भी होगी अहम
मानसून सत्र से पहले सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की जाएगी ताकि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके। हालांकि, विपक्ष पहले ही कई मुद्दों पर सरकार को घेरने के संकेत दे चुका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मानसून सत्र में सरकार की विधायी प्राथमिकताओं और विपक्ष की आक्रामक रणनीति के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। सरकार जहां अपने सुधारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रहा है।
