होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खुला तो गहरा सकता है वैश्विक ऊर्जा संकट, IEA प्रमुख की चेतावनी; भारत समेत एशिया पर बढ़ेगा असर
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा है कि यदि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अगले कुछ सप्ताह में सामान्य रूप से नहीं खुलता है, तो पूरी दुनिया को ऊर्जा सुरक्षा के गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
दुनिया के तेल कारोबार की जीवनरेखा है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी रास्ते से होता है। इस मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
IEA प्रमुख ने जताई चिंता
फातिह बिरोल ने कहा कि मौजूदा स्थिति केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक तेल भंडार और आपातकालीन उपाय कुछ समय तक राहत दे सकते हैं, लेकिन यदि संकट लंबा चला तो इनकी भी सीमा है।
भारत समेत एशियाई देशों पर अधिक असर
विशेषज्ञों के अनुसार भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया और कई अन्य एशियाई देश पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे तेल और एलएनजी पर काफी हद तक निर्भर हैं। यदि होर्मुज मार्ग बाधित रहता है, तो इन देशों में ईंधन आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल, गैस और परिवहन लागत पर पड़ने की आशंका है।
तेल की कीमतों में बढ़ी अस्थिरता
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज और लाल सागर जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों पर संकट जारी रहा, तो वैश्विक तेल कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
IEA के पास है आपात योजना
IEA ने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर सदस्य देशों के रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग कर बाजार को अस्थायी राहत दी जा सकती है। हालांकि एजेंसी का मानना है कि स्थायी समाधान तभी संभव है, जब समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही बहाल हो और क्षेत्रीय तनाव कम हो।
भारत की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होती है, तो सरकार आवश्यक कदम उठाकर घरेलू ईंधन आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने का प्रयास कर सकती है। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने पर निर्भर करेगी।
