देर से जमा अंशदान के आधार पर स्वास्थ्य कवरेज से इनकार नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
लंपसम योगदान के बावजूद ₹13 लाख के इलाज खर्च की भरपाई के आदेश
देहरादून: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि स्वास्थ्य योजना के तहत लाभ केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि अंशदान देरी से या एकमुश्त जमा किया गया हो। अदालत ने राज्य सरकार को एक सेवानिवृत्त प्राचार्य के फेफड़ों के कैंसर के इलाज पर खर्च हुए ₹13 लाख से अधिक की राशि का भुगतान चार सप्ताह के भीतर करने के आदेश दिए हैं।
मामला एक सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य से जुड़ा है, जिन्होंने राज्य की ‘गोल्डन कार्ड’ स्वास्थ्य योजना के तहत ₹20,000 की एकमुश्त राशि जमा की थी। स्वास्थ्य विभाग ने उनका दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि योजना को अपनाने में देरी हुई और योगदान नियमित मासिक किस्तों के बजाय एक साथ जमा किया गया।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब राज्य ने अंशदान स्वीकार कर लिया, तो बाद में केवल भुगतान के तरीके या समय के आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि योजना का उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनरों को चिकित्सा सुरक्षा प्रदान करना है, न कि तकनीकी आधार पर दावों को अस्वीकार करना।
राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि योजना के तहत मासिक अंशदान समय पर काटकर जमा करना आवश्यक है, लेकिन अदालत ने माना कि यदि अंशदान स्वीकार कर लिया गया है, तो लाभ देने से इंकार करना अनुचित होगा।
यह फैसला राज्य के हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने किसी कारणवश देरी से अंशदान जमा किया हो।
