‘मेरे नाम से फैलाया जा रहा AI डीपफेक वीडियो’ : पीयूष गोयल ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

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PYUSH

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनके नाम से प्रसारित किया जा रहा वीडियो पूरी तरह AI से तैयार किया गया डीपफेक (Deepfake) है और उसमें दिखाई गई बातें उन्होंने कभी नहीं कही हैं। मंत्री ने ऐसे फर्जी वीडियो को साझा करने और फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

पीयूष गोयल ने वीडियो को बताया फर्जी

पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में उनकी आवाज और चेहरा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री का उद्देश्य लोगों को गुमराह करना और गलत सूचना फैलाना है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी वीडियो या संदेश पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

PIB फैक्ट चेक ने भी किया खंडन

सरकार की प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) फैक्ट चेक यूनिट ने भी वायरल वीडियो को फर्जी करार दिया है। PIB के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने छात्रों के प्रदर्शन को लेकर वीडियो में दिखाई गई कोई टिप्पणी नहीं की है। फैक्ट चेक यूनिट ने कहा कि यह AI से तैयार किया गया भ्रामक वीडियो है, जिसे सोशल मीडिया पर गलत दावे के साथ प्रसारित किया जा रहा है।

सख्त कार्रवाई की चेतावनी

पीयूष गोयल ने कहा कि फर्जी वीडियो बनाना और उसे साझा करना गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां मामले की निगरानी कर रही हैं और जो लोग इस तरह की भ्रामक सामग्री तैयार करने या प्रसारित करने में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की अपील

मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे बिना पुष्टि किए किसी भी वीडियो, ऑडियो या पोस्ट को साझा न करें। उन्होंने कहा कि AI तकनीक का दुरुपयोग कर डीपफेक सामग्री तैयार करना लोकतांत्रिक संवाद और जनविश्वास के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

AI डीपफेक पर बढ़ी चिंता

हाल के वर्षों में AI आधारित डीपफेक वीडियो और ऑडियो के मामले तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्षरता और सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। सरकार ने भी नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध डिजिटल सामग्री की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें और केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें।

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