बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, अनुच्छेद 164(4) की 6 महीने की सीमा पर होगी अहम सुनवाई
नई दिल्ली। बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को लेकर संवैधानिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में दायर याचिका में उनकी दोबारा मंत्री नियुक्ति को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य बने बिना दोबारा मंत्री बनाए गए हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 164(4) की भावना के विपरीत है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों पर सुनवाई करेगा।
क्या है अनुच्छेद 164(4)?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विधायक या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो उसे मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। यदि वह निर्धारित अवधि में निर्वाचित या मनोनीत नहीं होता, तो वह मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो देता है।
याचिका में क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता का कहना है कि दीपक प्रकाश को पहले नवंबर 2025 में मंत्री बनाया गया था। छह महीने की अवधि पूरी होने से पहले सरकार बदल गई और मई 2026 में उन्हें फिर से मंत्री पद की शपथ दिला दी गई। याचिका में तर्क दिया गया है कि नई शपथ के जरिए छह महीने की संवैधानिक सीमा को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार, मंत्री दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या सरकार बदलने या दोबारा शपथ दिलाने से अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलने वाली छह महीने की अवधि फिर से शुरू हो सकती है।
संवैधानिक व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल बिहार तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में उन सभी राज्यों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां किसी गैर विधायक को मंत्री बनाया जाता है। इस निर्णय से अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या और स्पष्ट हो सकती है।
फैसले पर टिकी देशभर की नजर
फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि गैर विधायक मंत्री की नियुक्ति और पुनर्नियुक्ति को लेकर संविधान की सीमा क्या है। इस कारण राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर इस सुनवाई पर बनी हुई है।
