कांवड़ यात्रा 2026: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नहीं चल सकेंगे कांवड़िये, सरकार ने जारी किए निर्देश
देहरादून। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा 2026 को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पैदल कांवड़ियों की आवाजाही की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं को पहले से निर्धारित पारंपरिक कांवड़ मार्गों का ही उपयोग करना होगा। यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार यातायात को देखते हुए लिया गया है।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के अधिकारियों के साथ कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वय के साथ कार्य करने और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।
एक्सप्रेसवे पर पैदल यात्रा पर रोक
सरकार का कहना है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक नियंत्रित प्रवेश (Access Controlled) हाई-स्पीड मार्ग है, जहां वाहनों की गति अधिक रहती है। ऐसे में पैदल कांवड़ियों की आवाजाही दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी वजह से श्रद्धालुओं को एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उन्हें पारंपरिक कांवड़ मार्गों से ही यात्रा करनी होगी।
यूपी और दिल्ली को भी दिए गए निर्देश
उत्तराखंड सरकार ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली प्रशासन से भी समन्वय बनाकर यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। कांवड़ यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों की पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्य करेंगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सुरक्षा और यातायात पर रहेगा विशेष फोकस
प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर पर्याप्त पुलिस बल, सीसीटीवी निगरानी, चिकित्सा शिविर, पेयजल, स्वच्छता और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भारी वाहनों और सामान्य यातायात के लिए आवश्यकतानुसार डायवर्जन प्लान भी लागू किया जाएगा।
श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने की अपील
सरकार ने कांवड़ियों से अपील की है कि वे केवल निर्धारित मार्गों का उपयोग करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने से यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से संपन्न कराई जा सकेगी।
लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
हर वर्ष श्रावण मास में उत्तराखंड के हरिद्वार और अन्य गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालु गंगाजल लेने पहुंचते हैं। इसके बाद वे अपने-अपने राज्यों में भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में कांवड़ियों के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
