देश के विकास की बागडोर अब युवाओं के हाथ में: पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईआईटी कानपुर के 54वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचें। इस दौरान उनके साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौज़ूद थे। यहां पर छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कानपुर के लिए आज का दिन दोहरी खुशी का दिन है। एक तरफ कानपुर को मेट्रो रेल की सुविधा मिल रही है तो दूसरी तरफ तकनीक की दुनिया को भी आईआईटी कानपुर से बेशकीमती तोहफे मिल रहे हैं।

आईआईटी कानपुर के 54वें दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी ने कहा, ”आपने जब आईआईटी कानपुर में प्रवेश लिया था और अब जब आप यहां से निकल रहे हैं, तब और अब में आप अपने में बहुत बड़ा परिवर्तन महसूस कर रहे होंगे। यहां आने से पहले एक अज्ञात का डर होगा, एक अज्ञात की क्वेरी होगी। अब अज्ञात का डर नहीं है, अब पूरी दुनिया को एक्सपलोर करने का हौसला है। अब अज्ञात की क्वेरी नहीं है, अब सर्वश्रेष्ठ के लिए क्वेस्ट है, पूरी दुनिया पर छा जाने का सपना है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”कानपुर भारत के उन कुछ चुनिंदा शहरों में से है, जो इतना विविध है। सत्ती चौरा घाट से लेकर मदारी पासी तक, नाना साहब से लेकर बटुकेश्वर दत्त तक, जब हम इस शहर की सैर करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हम स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों के गौरव की, उस गौरवशाली अतीत की सैर कर रहे हैं। 1930 के उस दौर में जो 20-25 साल के नौजवान थे, 1947 तक उनकी यात्रा और 1947 में आजादी की सिद्धि, उनके जीवन का गोल्डन फेज थी। आज आप भी एक तरह से उस जैसे ही गोल्डन इरा में कदम रख रहे हैं। जैसे ये राष्ट्र के जीवन का अमृतकाल है, वैसे ही ये आपके जीवन का भी अमृतकाल है।”

उन्होंने कहा, ”ये दौर, ये 21वीं सदी, पूरी तरह तकनीकी संचालित है। इस दशक में भी तकनीकी अलग-अलग क्षेत्रों में अपना दबदबा और बढ़ाने वाली है। बिना तकनीकी के जीवन अब एक तरह से अधूरा ही होगा। ये जीवन और तकनीकी की स्पर्धा का युग है और मुझे विश्वास है कि इसमें आप जरूर आगे निकलेंगे। जो सोच और रवैया आज आपका है, वही रवैया देश का भी है। पहले अगर सोच काम चलाने की होती थी, तो आज सोच कुछ कर गुजरने की, काम करके नतीजे लाने की है। पहले अगर समस्याओं से पीछा छुड़ाने की कोशिश होती थी, तो आज समस्याओं के समाधान के लिए संकल्प लिए जाते हैं।”

छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, ”जब देश की आजादी को 25 साल हुए, तब तक हमें भी अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए बहुत कुछ कर लेना चाहिए था। तब से लेकर अब तक बहुत देर हो चुकी है, देश बहुत समय गंवा चुका है। बीच में 2 पीढ़ियां चली गईं, इसलिए हमें 2 पल भी नहीं गंवाना। मेरी बातों में आपको अधीरता नजर आ रही होगी, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप भी इसी तरह आत्मनिर्भर भारत के लिए अधीर बनें। आत्मनिर्भर भारत, पूर्ण आजादी का मूल स्वरूप ही है, जहां हम किसी पर भी निर्भर नहीं रहेंगे। स्वामी विवेकानंद ने कहा था- प्रत्येक राष्ट्र के पास देने के लिए एक संदेश है, एक मिशन है जिसे पूरा करना है, एक नियति तक पहुंचना है। यदि हम आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तो हमारा देश अपने लक्ष्य कैसे पूरे करेगा, अपनी नियति तक कैसे पहुंचेगा? ”

उन्होंने कहा, ”आजादी के इस 75वें साल में हमारे पास 75 से अधिक unicorns हैं, 50,000 से अधिक स्टार्ट-अप हैं। इनमें से 10,000 तो केवल पिछले 6 महीनों में आए हैं। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनकर उभरा है। कितने स्टार्टअप्स तो हमारी आईआईटी के युवाओं ने ही शुरू किए हैं। कौन भारतीय नहीं चाहेगा कि भारत की कंपनियां वैश्विक बनें, भारत के उत्पाद वैश्विक बनें। जो आईआईटी को जानता है, यहां के टैलेंट को जानता है, यहां के प्रोफेसर्स की मेहनत को जानता है, वो ये विश्वास करता है ये आईआईटी के नौजवान जरूर करेंगे। आज से शुरू हुई यात्रा में आपको सहूलियत के लिए शॉर्टकट भी बहुत लोग बताएंगे। लेकिन मेरी सलाह यही होगी कि आप आराम मत चुनना, जरूर चुनना। क्योंकि, आप चाहें या न चाहें, जीवन में चुनौतियां आनी ही हैं। जो लोग उनसे भागते हैं वो उनका शिकार बन जाते हैं।”

आईआईटी कानपुर के 54वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ”आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए देश ने 2020 में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। आईआईटी कानपुर ने राज्य सरकार के साथ आपसी सहयोग के कई उदाहरण स्थापित किए हैं।”