90 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, दुनिया में बढ़ी महंगाई की आशंका; भारत पर भी पड़ सकता है असर
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई और ऊर्जा संकट की नई चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और गहराता है, तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है, इसलिए किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, हवाई यात्रा, परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। इससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका है।
शेयर बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
तेल की कीमतों में तेजी के साथ वैश्विक शेयर बाजारों में भी सतर्कता का माहौल है। निवेशकों को चिंता है कि यदि ऊर्जा लागत लगातार बढ़ती रही तो दुनिया के कई देशों में महंगाई फिर से तेज हो सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है।
क्या 100 डॉलर तक पहुंच सकता है तेल?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा तथा तेल आपूर्ति बाधित हुई, तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी छू सकता है। हालांकि यदि हालात सामान्य होते हैं और आपूर्ति सुचारु रहती है, तो कीमतों में कुछ राहत मिलने की संभावना भी बनी रहेगी।
सरकार और बाजार की नजर हालात पर
ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतें पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेंगी। भारत सहित कई बड़े आयातक देश स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि आपूर्ति और कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
