महंगाई का असर: आज के 10 लाख रुपये की 20 साल बाद कितनी रह जाएगी कीमत? समझिए पूरा हिसाब
नई दिल्ली। महंगाई आपकी आय और बचत की वास्तविक ताकत को समय के साथ कम करती है। बैंक खाते में रकम का आंकड़ा वही रहता है, लेकिन उससे खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा घटती जाती है। Times Now Navbharat की रिपोर्ट में 10 लाख रुपये के उदाहरण से समझाया गया है कि 20 साल में महंगाई आपकी रकम की खरीदने की क्षमता को किस तरह प्रभावित करती है।
6 फीसदी महंगाई मानें तो 10 लाख की वैल्यू 3.12 लाख
अगर सालाना औसत महंगाई दर 6 फीसदी मानी जाए, तो आज के 10 लाख रुपये की वास्तविक खरीद क्षमता 20 साल बाद करीब 3.12 लाख रुपये के बराबर रह जाएगी। यानी रकम 10 लाख रुपये ही रहेगी, लेकिन उसकी आज जैसी खरीद शक्ति नहीं रहेगी।
20 साल का पूरा हिसाब
रिपोर्ट के अनुसार 6 फीसदी सालाना महंगाई दर पर 10 लाख रुपये की वास्तविक वैल्यू इस तरह घटती है:
आज: 10 लाख रुपये
5 साल बाद: करीब 7.47 लाख रुपये
10 साल बाद: करीब 5.58 लाख रुपये
15 साल बाद: करीब 4.17 लाख रुपये
20 साल बाद: करीब 3.12 लाख रुपये
इस गणना से पता चलता है कि लंबी अवधि में महंगाई का असर तेजी से बढ़ता है।
आज का 10 हजार रुपये का खर्च 20 साल बाद कितना होगा?
मान लीजिए आपके परिवार का मौजूदा मासिक खर्च 10 हजार रुपये है। 6 फीसदी सालाना महंगाई लगातार बनी रहती है, तो 20 साल बाद इसी स्तर की खरीदारी के लिए करीब 32 हजार रुपये हर महीने चाहिए होंगे। इसी तरह आज जिन वस्तुओं और सेवाओं पर 10 लाख रुपये खर्च होते हैं, उनके लिए 20 साल बाद करीब 32 लाख रुपये की जरूरत पड़ सकती है।
सिर्फ बचत करने से लक्ष्य पूरा नहीं होगा
लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य बनाते समय केवल जमा रकम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। निवेश से मिलने वाला रिटर्न महंगाई की दर से कम रहा, तो रकम बढ़ने के बावजूद उसकी वास्तविक खरीद क्षमता घट सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेश पर 3 से 4 फीसदी रिटर्न मिलता है और महंगाई 6 फीसदी की दर से बढ़ती है, तो महंगाई को समायोजित करने के बाद वास्तविक रिटर्न नकारात्मक रहेगा। इसलिए लंबी अवधि की वित्तीय योजना में महंगाई को शामिल करना जरूरी है।
महंगाई क्यों बनती है बड़ी चुनौती?
महंगाई का असर एक साल में सीमित दिख सकता है। लेकिन कई वर्षों तक लगातार कीमतें बढ़ने पर इसका प्रभाव बड़ा हो जाता है। घर, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ता खर्च भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों को प्रभावित करता है।
इसलिए रिटायरमेंट, बच्चों की शिक्षा या घर खरीदने जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए आज की लागत को आधार बनाना पर्याप्त नहीं है। भविष्य की अनुमानित महंगाई को भी गणना में शामिल करना जरूरी है।
निवेश से पहले वास्तविक रिटर्न समझना जरूरी
किसी निवेश की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि रकम कितनी बढ़ी। वास्तविक सवाल यह है कि महंगाई को समायोजित करने के बाद आपकी खरीद क्षमता कितनी बढ़ी।
इसलिए बचत के साथ ऐसे निवेश विकल्पों का मूल्यांकन करना जरूरी है जिनका संभावित रिटर्न आपके वित्तीय लक्ष्य और महंगाई की अनुमानित दर के अनुरूप हो। निवेश का फैसला लेने से पहले जोखिम, अवधि और रिटर्न की अनिश्चितता को भी ध्यान में रखना चाहिए।
निष्कर्ष
आज के 10 लाख रुपये 20 साल बाद भी खाते में 10 लाख रुपये ही दिखेंगे। लेकिन 6 फीसदी औसत महंगाई के अनुमान पर उनकी खरीद क्षमता करीब 3.12 लाख रुपये के बराबर रह जाएगी। यही वजह है कि लंबी अवधि की वित्तीय योजना में केवल बचत नहीं, बल्कि महंगाई और वास्तविक रिटर्न दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।
