नदियों में खनिज निकासी पर फिलहाल रोक, मानसून बाद खनन राजस्व बढ़ाने की तैयारी
देहरादून:मानसून के चलते प्रदेश की नदियों में खनिज निकासी फिलहाल सीमित है। बरसात के बाद अब खनन गतिविधियां दोबारा शुरू कर राजस्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। उत्तराखंड ने खनन से वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक 1217 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था।
खनन व्यवस्था में बदलाव और तकनीक पर जोर
सरकार ने खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नीतिगत और तकनीकी स्तर पर कई बदलाव किए गए हैं। खनिज नीति और नियमावली में किए गए सरलीकरण के साथ वैध खनन को बढ़ावा देने और अवैध खनन, परिवहन व भंडारण पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है। खनन प्रक्रिया की निगरानी के लिए माइनिंग डिजिटल ट्रांसफार्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम लागू किया गया। इसके तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में 45 ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इनमें वाहनों की निगरानी के लिए एएनपीआर कैमरा और आरएफआईडी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
खनन सुधारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना
खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों से उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में एमटीटीएसएस और और ई-खन्ना सिक्योरिटी पेपर परियोजनाओं को स्कॉच अवार्ड (गोल्ड) से सम्मानित किया गया। खान मंत्रालय की माइनर मिनरल रिफॉर्म श्रेणी में उत्तराखंड को ‘सी’ श्रेणी के राज्यों में दूसरा स्थान मिला। इसके तहत राज्य को 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली। स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में प्रदर्शन के आधार पर भी 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।
प्रदेश में अवैध खनन रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था का लागू किया है। इसका परिणाम यह रहा कि खनन से 1217 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों पर केंद्र सरकार की ओर से 200 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो चुकी है। -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
