आकाश आनंद की विदाई से बसपा में हलचल, अशोक सिद्धार्थ को लेकर उठे कई सवाल

0
AKASH_MAYAWATI_1789013465125_04e6b5bd-0b89-4dea-9347-b5b1de9f5ba3_1789013472599_bb1ba506-624e-4346-b9bc-75b2ca01368a_34361e35-de1a-4375-9446-f8ac1911512c_cc500c9b-6650-4f69-a1ac-35d92e334572

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में पिछले कुछ समय से चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के ऐलान के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने उनके करीबी माने जाने वाले आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया। इसके साथ ही पार्टी के भीतर चल रहे पुराने विवाद और नेताओं के बीच बढ़ती दूरी भी सामने आने लगी है।

अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से दूरी बनाने का फैसला ऐसे समय में किया है, जब लंबे समय से उनके खिलाफ पार्टी के अंदर नाराजगी की खबरें आती रही हैं। अपने संन्यास के ऐलान के दौरान उन्होंने अपने खिलाफ हुई कथित साजिश में कुछ पार्टी पदाधिकारियों की भूमिका की ओर भी इशारा किया। सूत्रों के मुताबिक, उनका संकेत पार्टी के दो बड़े पदाधिकारियों की तरफ माना जा रहा है, जिनके साथ लंबे समय से उनके रिश्ते तनावपूर्ण बताए जाते रहे हैं।

बसपा की अंदरूनी राजनीति पर नजर रखने वालों के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ को लेकर पार्टी नेतृत्व में नाराजगी कोई नई बात नहीं थी। पिछले करीब दो वर्षों में उनके खिलाफ कई बार कार्रवाई हुई। उन्हें पार्टी से दो बार बाहर किया गया। उनके खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में कथित गड़बड़ी और दिल्ली चुनाव में हस्तक्षेप जैसे आरोप भी लगाए गए। इसके अलावा पार्टी अनुशासन का पालन नहीं करने और नेतृत्व के निर्देशों के खिलाफ काम करने की शिकायतें भी सामने आईं।

घटनाक्रम में अशोक सिद्धार्थ पर उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप लगाए गए। इसके बाद पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर सवाल और ज्यादा गंभीर हो गए। अशोक सिद्धार्थ और पार्टी के कुछ बड़े पदाधिकारियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का असर धीरे-धीरे बसपा की दूसरी पीढ़ी की राजनीति पर भी दिखाई देने लगा। खासकर आकाश आनंद के साथ जुड़े नेताओं और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच मतभेद की चर्चाएं तेज हुईं।

बताया जाता है कि आकाश आनंद के कुछ करीबी नेताओं ने संगठन में काम करने के तरीके और कुछ पदाधिकारियों की कार्यशैली में बदलाव की जरूरत बताई थी। हालांकि, पार्टी नेतृत्व के सामने इन बातों को किस तरह रखा गया, इसको लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं सामने आती रही हैं। इसी पूरे विवाद के बीच आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका लगातार कमजोर होती गई। अब अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास और आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद बसपा के अंदर के पुराने समीकरण फिर चर्चा में आ गए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा का नाम भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को 3 अगस्त को पार्टी से बाहर किया था। इसके करीब दस दिन बाद अंटू मिश्रा पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया गया। अंटू मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ के बीच करीबी संबंधों को इस कार्रवाई की प्रमुख वजहों में से एक माना जा रहा है।

दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक नजदीकी को लेकर पार्टी के भीतर पहले से ही चर्चा थी। अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ कार्रवाई के बाद अंटू मिश्रा का निष्कासन यह संकेत देने वाला माना गया कि बसपा नेतृत्व संगठन में किसी भी तरह के समानांतर प्रभाव को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।

आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद बसपा की आगे की रणनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। आकाश आनंद को मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया था और पार्टी की युवा राजनीति में उन्हें अहम चेहरा माना जाता था। उनके आसपास के नेताओं और संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच मतभेद की खबरों ने उनकी राजनीतिक राह मुश्किल कर दी। अब अशोक सिद्धार्थ के हटने और पार्टी के भीतर समीकरण बदलने के बाद आकाश आनंद को लेकर फिर से अटकलें शुरू हो गई हैं।

बसपा की राजनीति को करीब से समझने वाले लोगों का मानना है कि आने वाले समय में पार्टी के भीतर कुछ फैसले पुराने समीकरणों को बदल सकते हैं। ऐसे में आकाश आनंद की वापसी की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

अशोक सिद्धार्थ ने अपने संन्यास के ऐलान के दौरान पार्टी के अंदर उनके खिलाफ हुई कथित साजिश का जिक्र किया। उन्होंने सीधे तौर पर नाम नहीं लिए, लेकिन उनके बयान के बाद बसपा के दो बड़े पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। पार्टी के भीतर पहले से मौजूद मतभेदों को देखते हुए माना जा रहा है कि यह विवाद सिर्फ एक नेता के निष्कासन तक सीमित नहीं है।

इसके पीछे संगठन में प्रभाव, फैसलों पर पकड़ और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चल रही खींचतान भी एक बड़ी वजह हो सकती है। यही कारण है कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास और आकाश आनंद के निष्कासन को बसपा की अंदरूनी राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि मायावती अब पार्टी की कमान और युवा नेतृत्व को किस दिशा में ले जाती हैं। आकाश आनंद को हटाने के बाद संगठन में युवा चेहरे की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। दूसरी तरफ, अशोक सिद्धार्थ और अंटू मिश्रा पर हुई कार्रवाई के बाद पार्टी नेतृत्व ने यह साफ संकेत दिया है कि संगठन के भीतर अनुशासन और नेतृत्व के फैसलों से समझौता नहीं किया जाएगा।

इन घटनाओं के बाद बसपा के अंदर कौन सा नया समीकरण बनता है, यह आने वाले दिनों में ही साफ होगा। आकाश आनंद की संभावित वापसी, नए नेताओं को जिम्मेदारी और संगठन में बदलाव जैसे मुद्दे फिलहाल बसपा की राजनीति के केंद्र में हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *