NCPI ने लोकसभा में घोषित की नई टीम, सुदीप बंद्योपाध्याय बने संसदीय दल के नेता, काकोली घोष दस्तीदार को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर बने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने लोकसभा में अपने संसदीय दल की नई टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को लोकसभा में संसदीय दल का नेता नियुक्त किया है। वहीं वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को उपनेता और शताब्दी रॉय समेत कई अन्य सांसदों को संसदीय टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सुदीप बंद्योपाध्याय को मिली कमान

NCPI ने संसद में अपनी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने के लिए अनुभवी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को संसदीय दल का नेता बनाया है। पार्टी का मानना है कि उनके लंबे संसदीय अनुभव का लाभ सदन के भीतर पार्टी को मिलेगा। हाल ही में TMC से अलग हुए सांसदों ने NCPI के बैनर तले नई राजनीतिक पारी शुरू की है।

काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय को अहम जिम्मेदारी

नई संसदीय टीम में काकोली घोष दस्तीदार को उपनेता की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि शताब्दी रॉय को भी प्रमुख भूमिका सौंपी गई है। पार्टी ने विभिन्न संसदीय दायित्वों के लिए अन्य सांसदों के नामों की भी घोषणा की है, ताकि संसद के दोनों सदनों में संगठनात्मक समन्वय मजबूत किया जा सके।

TMC में बढ़ा सियासी संकट

NCPI की नई संसदीय टीम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस अपने बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर दल बदलने वाले 20 सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया है।

संसद में बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता

NCPI के संसदीय दल के गठन के बाद संसद में पार्टी की भूमिका और अधिक सक्रिय होने की संभावना है। हाल ही में एनडीए की संसदीय बैठक में भी NCPI के सांसदों की मौजूदगी चर्चा का विषय रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ संसद के भीतर भी इस नए दल की भूमिका आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकती है।

निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर

अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले पर है, जिसमें TMC से अलग हुए सांसदों की सदस्यता को लेकर दायर अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लिया जाना है। इस फैसले का असर पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

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