सुस्त पड़ा मानसून, 14 जून तक 28% कम बारिश; किसानों की आय पर असर की आशंका, सरकार ने दिया भरोसा
नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। 1 जून से 14 जून के बीच देशभर में सामान्य से 28.4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस स्थिति को “डिफिशिएंट” यानी कमी वाली श्रेणी में रखा है। मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों के साथ-साथ सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा कि कम बारिश का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है और किसानों की आय दबाव में आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं होगी, क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है।
किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है साल
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष से ही सरकार ने अनाज का पर्याप्त भंडार बनाए रखा है। ऐसे में आम लोगों को खाद्यान्न उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, बारिश की कमी खेती और किसानों की आय पर असर डाल सकती है।
उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी तनाव का भी जिक्र किया और कहा कि इससे उर्वरकों की आपूर्ति तथा कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है, जो कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकता है।
14 दिनों में सामान्य से काफी कम बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 14 जून के बीच देश में केवल 40.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 56.1 मिलीमीटर है।
आईएमडी का अनुमान है कि जून महीने में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। वर्ष 2023 के बाद यह पहला अवसर होगा जब मानसून का प्रदर्शन औसत से नीचे रहने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम विभाग ने जून से सितंबर तक के पूरे मानसून सीजन के लिए वर्षा अनुमान को घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया है। इससे सूखे जैसी स्थिति की आशंका को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
महाराष्ट्र और गुजरात में अधिक असर की संभावना
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अक्षय देओरास के अनुसार, जून के अंत तक महाराष्ट्र और गुजरात में वर्षा की कमी अधिक दिखाई दे सकती है। हालांकि 20 जून के बाद मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 25 जून तक दक्षिण भारत, पूर्वी भारत और मध्य भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश शुरू हो सकती है।
दिल्ली-एनसीआर को करना पड़ सकता है इंतजार
दिल्ली-एनसीआर में मानसून की एंट्री फिलहाल धीमी नजर आ रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 25 जून तक राजधानी में मानसून पहुंचने की संभावना काफी कम है। ऐसे में लोगों को गर्मी और उमस से राहत के लिए अभी कुछ और दिन इंतजार करना पड़ सकता है।
कहां तक पहुंचा मानसून?
इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य तिथि से चार दिन देरी से 5 जून को केरल पहुंचा था। इसके बाद मानसून ने धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों को कवर कर लिया है।
पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले 6 से 7 दिनों के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह भी जारी की गई है।
देशभर में अब मौसम विभाग और कृषि क्षेत्र की नजरें मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले कुछ सप्ताह खरीफ फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
