महिला-केंद्रित कौशल विकास को मजबूती, एमएसडीई और आईपीई ग्लोबल के बीच समझौता

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युवा महिलाओं के लिए लिंग-संवेदनशील और भविष्य-तैयार कौशल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम

महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने और कौशल सशक्तिकरण के माध्यम से समावेशी आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने आईपीई ग्लोबल लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य पूरे भारत में युवा महिला-केंद्रित, लिंग-संवेदनशील और भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है।

यह गठजोड़ कार्यक्रमों के डिज़ाइन को बेहतर बनाने, महत्वाकांक्षी रोजगार भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, तथा कौशल विकास, रोजगार योग्यता और समावेशी आर्थिक विकास के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने पर केंद्रित है।

इस अवसर पर कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की सचिव श्रीमती देबश्री मुखर्जी ने कहा कि महिलाओं का कौशल विकास भारत की समावेशी वृद्धि और कार्यबल परिवर्तन के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “आईपीई ग्लोबल के साथ यह साझेदारी एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों की युवा महिलाएं महत्वाकांक्षी अवसरों, सम्मानजनक रोजगार मार्गों और बदलती अर्थव्यवस्था में सफल होने के लिए आवश्यक समर्थन प्रणालियों तक पहुँच सकें।”

इस साझेदारी के तहत साक्ष्य-आधारित और लिंग-संवेदनशील उपायों को अपनाकर महिलाओं की कौशल विकास में भागीदारी और परिणामों को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना, प्रशिक्षण को उद्योग की मांग के अनुरूप बनाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से रोजगार के अवसरों को सशक्त करना है।

समझौते के अंतर्गत महिलाओं की औपचारिक रोजगार और कौशल प्रशिक्षण में भागीदारी बढ़ाने के लिए बहुभाषी राष्ट्रीय जागरूकता अभियान, लिंग-संवेदनशील भर्ती प्रतिबद्धताओं के जरिए नियोक्ताओं की अधिक भागीदारी, तथा डेटा-आधारित शासन को समर्थन देने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र विकसित किए जाएंगे। यह पहल किशोरियों के लिए एमएसडीई के विशेष कौशल विकास प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करेगी, जिससे एक अधिक समावेशी, परिणाम-केंद्रित और भविष्य-उन्मुख कौशल विकास मॉडल तैयार किया जा सके।

सरकार का मानना है कि यह साझेदारी न केवल महिलाओं के लिए बेहतर कौशल और रोजगार अवसर सुनिश्चित करेगी, बल्कि भारत के समग्र कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को भी नई दिशा देगी।

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