उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया मंजूर | विपक्ष ने उठाए सवाल, फोन कॉल बना सियासी तूफान का कारण?

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Jagdeep-Dhankhar

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। धनखड़ ने अपने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन सियासी गलियारों में यह कदम एक नए राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है।

कांग्रेस नेता सुखदेव भगत सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस इस्तीफे को “पहले से तय पटकथा” बताया है। NDTV की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि धनखड़ को केंद्र सरकार की ओर से एक फोन कॉल आया था, जिसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और उन्होंने अपना पद छोड़ दिया।

क्या था पूरा मामला?

मॉनसून सत्र के पहले दिन यानी सोमवार को विपक्ष ने राज्यसभा में एक नोटिस पेश किया था, जिसमें जज यशवंत वर्मा को हटाने की मांग की गई थी। जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद यह प्रस्ताव लाया गया। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के रूप में जगदीप धनखड़ ने इस नोटिस को स्वीकार करते हुए महासचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार को उपराष्ट्रपति का यह कदम रास नहीं आया। इसके बाद कथित तौर पर एक तीखी फोन बातचीत हुई, जिसमें धनखड़ ने अपने संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया। इस बातचीत के बाद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा तेज हो गई। माना जा रहा है कि इससे पहले की स्थिति और बिगड़ती, धनखड़ ने स्वयं इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों जस्टिस वर्मा को हटाने पर सहमत, फिर क्यों हुआ टकराव?

दिलचस्प बात यह है कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों ही सहमत दिखाई दे रहे हैं। लोकसभा में सोमवार को सरकार की ओर से लाए गए प्रस्ताव पर 152 सांसदों ने हस्ताक्षर किए, जबकि राज्यसभा में विपक्ष के प्रस्ताव को 63 सांसदों का समर्थन मिला।

हालांकि, जानकारों के अनुसार, टकराव इस बात को लेकर हुआ कि इसका श्रेय कौन लेगा। विपक्ष चाहता था कि यह कदम उसकी पहल पर हो, जबकि सरकार इसे अपनी कार्यवाही के रूप में प्रस्तुत करना चाहती थी। इस क्रेडिट वॉर ने पूरे मामले को जटिल बना दिया।

क्या यह महज इस्तीफा था या दबाव की राजनीति का परिणाम?

धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों ही न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर एकमत दिखाई दे रहे थे। लेकिन जिस तरह से एक फोन कॉल के बाद घटनाक्रम बदला, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए उपराष्ट्रपति की नियुक्ति कैसे होती है और क्या यह प्रकरण आगामी सत्रों में सत्ता और विपक्ष के बीच नए टकराव की नींव बनता है।

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