जोधपुर, 22 जुलाई 2025: भारतीय थलसेना को अमेरिका निर्मित अत्याधुनिक अपाचे AH-64E लड़ाकू हेलीकॉप्टर्स की पहली खेप मिल गई है। इन हेलीकॉप्टर्स को रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया गया है। इससे पहले ये उन्नत हेलीकॉप्टर केवल भारतीय वायुसेना के पास थे, लेकिन अब थलसेना की ताकत में भी इनकी एंट्री से बड़ा इजाफा हुआ है।
यह कदम भारतीय सेना की बदलती रणनीति को दर्शाता है, जहां मल्टी-डोमेन ऑपरेशनों में थलसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल को प्राथमिकता दी जा रही है।
अपाचे AH-64E की खासियतें जो बनाती हैं इसे ‘बैटलफील्ड गेमचेंजर’
1. एडवांस्ड सेंसर और नाइट विजन सिस्टम से लैस
अपाचे हेलीकॉप्टर में अत्याधुनिक नाइट विजन और थर्मल इमेजिंग सेंसर लगे हैं, जो इसे रात में और खराब मौसम में भी दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम बनाते हैं। इसका Target Acquisition System और Pilot Night Vision Sensor (PNVS) पायलट को कम दृश्यता में भी सटीक हमला करने की क्षमता देता है।
2. आधुनिक रडार और संचार सिस्टम
यह हेलीकॉप्टर AN/APG-78 Longbow रडार और JTIDS (Joint Tactical Information Distribution System) से लैस है, जो इसे नेटवर्क-केंद्रित युद्ध संचालन में अत्यंत प्रभावी बनाता है। इसके अलावा, यह Ku Frequency Band पर डेटा ट्रांसफर की सुविधा भी प्रदान करता है।
3. घातक हथियार प्रणाली
अपाचे में शामिल हथियार इसे किसी भी युद्धक्षेत्र में अत्यंत शक्तिशाली बनाते हैं:
AGM-114 Hellfire Missile: टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने में सक्षम।
Hydra 70 Rockets: ज़मीनी लक्ष्यों पर हमला करने वाले 70mm के अनगाइडेड रॉकेट्स।
Stinger Missiles: हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें।
Spike NLOS Missiles: 25 किमी से अधिक दूरी तक सटीक हमले की क्षमता।
यह हेलीकॉप्टर एक मिनट में 128 टारगेट को लॉक कर, 16 अलग-अलग लक्ष्यों पर एकसाथ हमला कर सकता है, जिससे यह भीड़-भाड़ वाले युद्धक्षेत्र में बेहद उपयोगी बनता है।
4. उड़ान क्षमता और रेंज
अपाचे की अधिकतम उड़ान गति 280–365 किमी/घंटा तक जाती है। यह एक बार में 3.5 घंटे तक उड़ान भर सकता है और इसकी ऑपरेशनल रेंज 500 किमी तक होती है (बाहरी फ्यूल टैंक के साथ यह और भी अधिक हो जाती है)। यह लंबी दूरी की गश्त और हमलों के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
5. ड्रोन कंट्रोल और नेटवर्क-सपोर्टेड ऑपरेशन्स
अपाचे, MQ-1C ग्रे ईगल जैसे ड्रोन को नियंत्रित कर सकता है, जिससे मानव-मशीन टीमिंग (MUM-T) का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके सेंसर और रडार सिस्टम इसे टोही और निगरानी मिशनों में भी अत्यंत दक्ष बनाते हैं।
6. मल्टी-डोमेन कोऑर्डिनेशन
अपाचे का डिज़ाइन इसे ग्राउंड स्ट्राइक, एयर डिफेंस और रीकॉन मिशनों के लिए एक साथ सक्षम बनाता है। इससे थलसेना को युद्ध के हर मोर्चे पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।
7. सुरक्षा और बख्तरबंदी
दो पायलटों के लिए बनाए गए इस हेलीकॉप्टर का खाली वजन 6,838 किलोग्राम और अधिकतम टेक-ऑफ वजन 10,433 किलोग्राम है। यह आर्मर प्रोटेक्शन के साथ आता है, जो इसे छोटे हथियारों, गोलियों और बैलिस्टिक खतरों से बचाव प्रदान करता है।
रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कदम
अपाचे की तैनाती भारतीय थलसेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाई देती है। पश्चिमी सीमाओं पर त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की तैयारी को मजबूती मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत की सामरिक संतुलन क्षमता को नई धार मिलेगी