उत्तराखंड पर पैंतालिस हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ और केंद्रीय योजनाओं का पैसा माफ़ कर रही सरकार

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उत्तराखंड सरकार के खेल भी निराले हैं। राज्य पर पैंतालिस हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज़ है और सरकार की माली हालत इतनी ख़राब है कि वह अपने कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार भत्ते तक नहीं दे पा रही है क्योंकि इससे राजकोष पर सालाना तीन सौ करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। लेकिन फिर भी सरकार ने केंद्र से मिलने राज्य के हक़ के पैसे को माफ़ कर दिया है। इस राशि से सरकार को बड़ी राहत मिल सकती थी।

त्रिवेंद्र रावत कैबिनेट ने अपने ताज़ा फ़ैलसे में कैरामपुर-काठगोदाम नेशनल हाइवे चौड़ीकरण के लिए 59.23 हेक्टेयर वन भूमि अधिगृहण करने के एवज में केंद्र से मिलने वाले बीस करोड़ बाइस लाख रुपये को माफ़ कर दिया है। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी देहरादून-हरिद्वार हाइवे के चौड़ीकरण में भी वन भूमि का 11 करोड़ रुपये माफ कर दिया गया था।

राज्य की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं कि इस पैसे की ज़रूरत न हो। दरअसल विभिन्न विकास योजनाओं केलिए अधिग्रहित की जा रही भूमि का मूल्य ही अगर राज्य केंद्र से समय पर ले ले तो वित्तीय संकट काफ़ी हद तक टल सकता है…. लेकिन राज्य सरकार इसकी ज़रूरत महसूस नहीं हुई।

वन मंत्री हरक सिंह रावत कहते हैं कि ऐसा केंद्र के दबाव में यह फ़ैसला लिया गया है क्योंकि केंद्र से राज्य को अरबों रुपये की योजनाओं का फ़ायदा मिल रहा है और दूसरे राज्य यह छूट दे रहे हैं।

 राज्य में चारधाम ऑल वेदर रोड के अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण, पंचेश्वर जल विद्युत परियोजना समेत कई केंद्रीय विकास योजनाएं संचालित हो रही हैं या पाइप लाइन में हैं। इन योजनाओं में सैकड़ों वर्ग किलोमीटर वन भूमि जा रही है।

राज्य सरकार की इस उदारता पर कांग्रेस चिंता जता रही है. कांग्रेस सरकार में वन मंत्री रहे दिनेश अग्रवाल कहते हैं कि राज्य सरकार का यह कदम एक नज़ीर साबित हो सकता है और तमाम केंद्रीय एजेंसियां वन भूमि का मूल्य माफ करने की मांग कर सकती हैं।

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