विरोधः कलस्टर विद्यालय योजना के विरोध में उतरे शिक्षक और अभिभावक
देहरादून। प्रदेश में कलस्टर विद्यालयों के नाम पर स्कूलों को मर्ज करने का विरोध शुरू हो गया है। राजकीय शिक्षक संघ, अभिभावकों और विपक्ष कांग्रेस ने इसे शिक्षा विरोधी फैसला बताया है। प्रदेश के विभिन्न अभिभावक संघ और स्कूल कमेटियों ने शासन-प्रशासन से सरकार के इस फैसले को वापस लिये जाने का आग्रह किया है। बता दें कि कलस्टर स्कूल खोले जाने प्रदेश से सरकारी माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 1552 से घटकर 559 रह जायेगी।
शिक्षा संघ ने किया विरोध
राजकीय शिक्षक संघ पौड़ी के जिलाध्यक्ष बलराज सिंह गुंसाई ने कलस्टर विद्यालयों के खुलने का विरोध करते हुए कहा कि इन विद्यालयों के खुलने से छात्र-छात्राओं को दूर स्कूल जाने में परेशानियों का सामना करने पड़ेगा।
वहीं राजकीय शिक्षक संघ जनपद उत्तरकाशी ने कलस्टर विद्यालय बनाए जाने का विरोध किया है। संघ ने प्रांतीय कार्यकारिणी को पत्र भेजकर कलस्टर विद्यालयों को शिक्षा व्यवस्था के लिए अहितकारी बताया है। संघ के जिलाध्यक्ष अतोल सिंह महर ने बताया कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राजकीय शिक्षक संघ कलस्टर विद्यालयों का विरोध कर रहा है।
राजकीय शिक्षक संघ अल्मोड़ा के जिलाध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा सभी के लिए उपलब्ध हो इस मकसद के साथ ग्रामीण अंचलों में विद्यालय खोले गये हैं। जहां पर निर्धन और वंचित तबके के छात्र-छात्राएं आसानी से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आज ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं का पंजीकरण भी विद्यालयों में निरंतर बढ़ा है। कलस्टर विद्यालय बनने के बाद इसका सबसे बड़ा नुकसान बालिका शिक्षा का होगा।
शिक्षक संघ के साथ ही अभिभावक भी लगातार कलस्टर विद्यालयों का विरोध कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह नीति छात्रहित में नहीं है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने स्कूलों को बंद करने का बताया शिक्षा विरोधी
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि राज्य में चल रहे स्कूलों को बंद करने का निर्णय शिक्षा विरोधी है। जो संविधान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम और सामाजिक न्याय की मूल भावना की स्पष्ट अवहेलना करता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कलस्टर स्कूल की अवधारण को शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनो के समुचित उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसमें कहीं भी स्कूलों को बंद कर मर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान में अनुच्छेद 21ए सभी बच्चों को 6 से 14 वर्ष की आयु में निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है, लेकिन भाजपा सरकार ने प्रदेश में स्कूलों को बंद करने जा रही है। जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में स्कूल दूर होने से बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
