NEET 2024 से 2026 तक क्या बदला? नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स के गठन के साथ परीक्षा सुधारों की नई शुरुआत
नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। यह फैसला 2024 और 2026 के NEET विवादों के बाद सामने आया है, जिनके कारण परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे थे।
2024 और 2026 के विवाद में क्या अंतर?
वर्ष 2024 में NEET परीक्षा के दौरान कथित पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स और असामान्य परिणामों को लेकर विवाद हुआ था। जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद कई सुधारों की सिफारिश की गई, लेकिन उनमें से कई पूरी तरह लागू नहीं हो सकीं। 2026 में एक बार फिर पेपर लीक के आरोप सामने आए, जिसके बाद छात्रों का देशव्यापी आंदोलन शुरू हुआ और परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की मांग तेज हो गई।
नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स की क्या होगी भूमिका?
सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स को राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की समीक्षा का दायित्व सौंपा गया है। समिति तकनीकी सुधार, डिजिटल सुरक्षा, परीक्षा संचालन, डेटा प्रबंधन और पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय सुझाएगी। साथ ही भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए संरचनात्मक बदलावों की भी सिफारिश करेगी।
तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिस पर हर छात्र और अभिभावक भरोसा कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था में तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा ताकि परीक्षा प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सके। सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की तैयारी भी कर रही है।
NTA में बड़े बदलाव की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के ढांचे, परीक्षा संचालन और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। ऑनलाइन परीक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन और बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी संकेत दिया है कि ऑनलाइन NEET को लेकर भविष्य का निर्णय इस टास्क फोर्स की सिफारिशों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की चुनौती
परीक्षा सुधारों की यह पहल ऐसे समय में हुई है जब लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी सुधार पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि संस्थागत जवाबदेही, मजबूत निगरानी व्यवस्था और समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक होगी। आने वाले महीनों में नंदन नीलेकणी की अगुवाई वाली टास्क फोर्स की सिफारिशों पर पूरे देश की नजर रहेगी।
