मोहन भागवत बोले, विभाजन के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं, विस्थापित थे
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश विभाजन के दौरान पाकिस्तान से भारत आए लोगों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 के विभाजन के बाद भारत आने वाले लोग “शरणार्थी” नहीं थे, बल्कि “विस्थापित” थे, क्योंकि भारत उनका अपना देश था और वे अपने ही घर लौटे थे।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर, जमीन और संपत्ति छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्हें शरणार्थी कहना उचित नहीं है। उनके अनुसार, जिन लोगों ने भारत को अपनी मातृभूमि माना और यहां आकर बस गए, वे अपने ही देश में आए थे।
विभाजन की पीड़ा का किया जिक्र
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि देश का विभाजन भारतीय समाज के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक था। उन्होंने कहा कि उस समय बड़ी संख्या में परिवारों को हिंसा और असुरक्षा के कारण अपना सब कुछ छोड़ना पड़ा। ऐसे लोगों के योगदान और संघर्ष को देश हमेशा याद रखेगा।
समाज को इतिहास से सीख लेने की अपील
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन जैसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों, इसके लिए समाज में एकता, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से इतिहास से सीख लेने और सामाजिक समरसता बनाए रखने का आह्वान किया।
बयान की हो रही चर्चा
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में विभाजन, विस्थापन और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर समय-समय पर चर्चा होती रही है। उनके “शरणार्थी नहीं, विस्थापित” वाले बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। समाचार लिखे जाने तक इस टिप्पणी पर किसी प्रमुख राजनीतिक दल की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
