लखनऊ अग्निकांड पर उठे बड़े सवाल, हादसा था या लापरवाही? योगी सरकार से जवाब मांग रहा पूरा शहर

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पूर्णिया क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश का माहौल है। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। अब इस घटना को लेकर योगी सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सोमवार को एक व्यावसायिक भवन में अचानक आग लग गई, जहां कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। आग इतनी तेजी से फैली कि कई छात्र और कर्मचारी अंदर फंस गए। जान बचाने के लिए कुछ लोगों को इमारत से छलांग तक लगानी पड़ी। घटना के बाद पूरे शहर में दहशत और गुस्से का माहौल है।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भवन में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी? स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। कई लोग यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर प्रशासन ने ऐसे भवनों की नियमित जांच क्यों नहीं की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की सूचना मिलते ही अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर हर संभव सहायता का भरोसा भी दिलाया।

घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में आग लगने के कारणों के साथ-साथ सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की भी पड़ताल की जाएगी।

इस बीच विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि केवल जांच के आदेश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

लखनऊ अग्निकांड अब केवल एक हादसा नहीं रह गया है, बल्कि यह शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। पूरे प्रदेश की नजर अब SIT जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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