मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता, देश में बारिश की कमी 18% तक पहुंची, UP-बिहार समेत कई राज्यों में सूखे जैसे हालात

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नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंच चुका है, लेकिन बारिश का असमान वितरण चिंता बढ़ा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में मानसूनी बारिश की कमी एक बार फिर बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

मानसून सीजन की शुरुआत में देशभर में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। इसके कारण कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए थे। जुलाई के पहले सप्ताह में हुई तेज बारिश से स्थिति में सुधार हुआ और 9 जुलाई तक बारिश की कमी घटकर 14 प्रतिशत रह गई थी।

हालांकि, जुलाई के मध्य में मानसूनी हवाओं की रफ्तार कमजोर पड़ने के बाद बारिश का अंतर फिर बढ़ गया है।

मुंबई में भारी बारिश से जलाशयों का जलस्तर बढ़ा

जुलाई के पहले सप्ताह में हुई भारी बारिश से मध्य और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों को राहत मिली।

मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में हुई तेज बारिश के कारण जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले जलाशयों का जलस्तर करीब 10 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत तक पहुंच गया।

भारी बारिश के कारण मुंबई के कई हिस्सों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की घटनाएं भी सामने आईं।

दिल्ली और उत्तर भारत में भी हुई बारिश

दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

भारी बारिश के कारण दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति देखने को मिली।

हालांकि, बारिश का यह दौर लंबे समय तक जारी नहीं रहा। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली में मानसूनी गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना है और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बौछारें पड़ सकती हैं।

इन राज्यों में अब भी कमजोर है मानसून

मौसम वैज्ञानिक शशि कांत के अनुसार, देश के कई महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में मानसूनी बारिश अब भी सामान्य से कम है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र और केरल तथा कर्नाटक के कुछ हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।

इन क्षेत्रों में बारिश की कमी का असर खेती, जलाशयों के जलस्तर और भूजल की स्थिति पर पड़ने की आशंका है।

मराठवाड़ा में सूखे जैसे हालात

महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और मुंबई में भारी बारिश हुई है, लेकिन राज्य के अंदरूनी हिस्सों की स्थिति अलग है।

मराठवाड़ा क्षेत्र में मानसूनी बारिश कमजोर बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसूनी हवाओं के पश्चिमी घाट को प्रभावी रूप से पार नहीं कर पाने के कारण मराठवाड़ा तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच रही है।

इससे क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति और किसानों की चिंता बढ़ रही है।

जुलाई की बारिश खेती के लिए महत्वपूर्ण

जुलाई को दक्षिण-पश्चिम मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है।

पूरे मानसून सीजन की करीब एक-तिहाई बारिश जुलाई में होती है। खरीफ फसलों, खासकर धान की बुआई के लिए इस महीने की बारिश महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके अलावा देश के जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए भी जुलाई की बारिश जरूरी है।

जुलाई में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

मौसम विभाग ने जुलाई में दीर्घकालिक औसत यानी LPA की करीब 94 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया है।

यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है।

अगर मानसून की गतिविधियां आने वाले दिनों में मजबूत नहीं होती हैं तो कृषि प्रधान राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता बढ़ सकती है।

उत्तर भारत की ओर खिसक रही मानसून ट्रफ

IMD के अनुसार, मानसून ट्रफ यानी कम दबाव की पट्टी धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है।

इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

इन राज्यों के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

UP-बिहार में बारिश की कमी घटने की उम्मीद

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर बढ़ने से इन राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान अच्छी बारिश होने का अनुमान है।

अगर बारिश का दौर जारी रहता है तो इन राज्यों में मानसूनी बारिश की कमी कम होने और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मध्य और दक्षिण भारत में कमजोर रहेगा मानसून

मौसम विभाग के अनुसार, इस सप्ताह मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर रह सकती हैं।

इन क्षेत्रों में बारिश की मात्रा कम रहने और कुछ स्थानों पर लंबे समय तक शुष्क मौसम बने रहने की संभावना है।

जल संरक्षण पर ध्यान देने की सलाह

मानसून के असमान वितरण और कई क्षेत्रों में बारिश की कमी को देखते हुए मौसम विशेषज्ञों ने जल संरक्षण पर जोर दिया है।

किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार फसलों की बुआई और सिंचाई की योजना बनाने की सलाह दी गई है।

देश में मानसून की आगे की स्थिति मानसून ट्रफ की दिशा, कम दबाव वाले क्षेत्रों के निर्माण और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पर निर्भर करेगी।

फिलहाल उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश बढ़ने की संभावना है, जबकि मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार कमजोर रहने का अनुमान है।

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