जुलाई में टैक्सपेयर्स के लिए अहम डेडलाइन, ITR से लेकर TDS रिटर्न तक समय पर निपटाएं जरूरी काम

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विशेषज्ञों का कहना है कि तय समय सीमा के भीतर सभी टैक्स संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने से ब्याज, जुर्माना और कानूनी परेशानियों से बचा जा सकता है।

7 जुलाई: TDS जमा करने की अंतिम तिथि

तिमाही भुगतान स्वीकृति योजना के तहत कार्य करने वाले टैक्स डिडक्टर्स के लिए अप्रैल से जून 2026 तिमाही का TDS जमा करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई है। निर्धारित समय के बाद भुगतान करने पर ब्याज और अन्य वैधानिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।

15 जुलाई: विभिन्न रिपोर्टिंग अनुपालन की समय सीमा

15 जुलाई तक कई महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग दायित्व पूरे करने होंगे। यह समय सीमा सरकारी विभागों, अधिकृत डीलरों, स्टॉक एक्सचेंजों, IFSC इकाइयों तथा विदेशी निवेशकों के साथ कार्य करने वाले वित्तीय मध्यस्थों पर लागू होती है।

30 जुलाई: चालान-सह-स्टेटमेंट जमा करने की अंतिम तारीख

जून महीने में काटे गए कुछ विशेष TDS से संबंधित चालान-सह-स्टेटमेंट जमा करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई निर्धारित की गई है। संबंधित टैक्स डिडक्टर्स को समय पर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

31 जुलाई: ITR दाखिल करने की सबसे महत्वपूर्ण डेडलाइन

31 जुलाई वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने वाले पात्र करदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण तारीख है। यदि इस तिथि तक रिटर्न दाखिल नहीं किया जाता है, तो बाद में बिलेटेड रिटर्न दाखिल करना होगा, जिसके साथ अतिरिक्त शुल्क और अन्य नियम लागू होंगे।

देर से ITR भरने पर कितना लगेगा जुर्माना

इनकम टैक्स अधिनियम की धारा 234F के अनुसार, समय सीमा के बाद आयकर रिटर्न दाखिल करने पर अधिकतम 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, यदि करदाता की कुल वार्षिक आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो विलंब शुल्क अधिकतम 1,000 रुपये तक सीमित रहेगा।

31 जुलाई तक TDS और TCS रिटर्न भी जरूरी

अप्रैल से जून 2026 तिमाही के लिए TDS और TCS रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि भी 31 जुलाई है। इसमें वे सभी विवरण शामिल हैं, जो वेतन, गैर-निवासी करदाताओं और अन्य भुगतान पर काटे गए टैक्स से संबंधित हैं।

इन जरूरी फॉर्मों को भी समय पर करें जमा

31 जुलाई तक कई महत्वपूर्ण टैक्स फॉर्म जमा करना भी अनिवार्य है। इनमें किराया कटौती के लिए फॉर्म 10BA, बकाया या अग्रिम वेतन पर राहत के लिए फॉर्म 10E तथा विदेशी आय और रॉयल्टी से जुड़े कर लाभों के लिए फॉर्म 10H, 10CCE और 10CCD शामिल हैं।

कर विशेषज्ञों का कहना है कि सभी करदाता अपने दस्तावेज पहले से तैयार रखें और अंतिम समय की जल्दबाजी से बचते हुए समय सीमा के भीतर सभी टैक्स संबंधी कार्य पूरे करें। इससे अनावश्यक जुर्माने, ब्याज और अनुपालन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।

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